पुष्कर | तीर्थराज पुष्कर सरोवर की पौराणिक गरिमा और स्वच्छता से हो रहे खिलवाड़ को न्यायालय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। आज सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड) पुष्कर, श्री विमल कुमार व्यास की अदालत ने सरोवर में व्याप्त गंदगी, आवारा जानवरों के प्रवेश और बदहाली पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर अजमेर, आयुक्त अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA), उपखण्ड अधिकारी (SDM) पुष्कर और आयुक्त नगर परिषद को नोटिस जारी कर इस मामले में तुरंत जवाब तलब किया है।
न्यायालय में प्रखर पैरवीपुष्कर की जागरूक महिला अधिवक्ता तेजस्वनी पाराशर व अंजली मुखिया की ओर से पेश जन प्रतिनिधित्व वाद पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायाधीश ने प्रशासन से सफाई व्यवस्था और घाटों के रखरखाव पर स्पष्टीकरण मांगा है। याचिका में रामायण और पुराणों का संदर्भ देते हुए उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय झील परियोजना के तहत करोड़ों रुपये व्यय होने के बावजूद बुनियादी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ है और सरोवर में काई, पॉलिथीन व अपशिष्ट सामग्री का साम्राज्य फैला हुआ है।
इन मुख्य बिंदुओं पर माँगा जवाब:
- सरोवर के 52 घाटों और बाजारों में व्याप्त गंदगी और अपशिष्ट सामग्री का तत्काल निस्तारण।
- सरोवर में आवारा जानवरों के प्रवेश और मछलियों के भक्षण को रोकने हेतु कड़े कदम।
- सीढ़ियों पर जमी काई को हटाने और घाटों के व्यवस्था सुधार की समयबद्ध रिपोर्ट।
दिनांक 25 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसकी अगली सुनवाई के लिए 25 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है। आज की कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर, एडवोकेट रोहन पाराशर एवं जितेश धनवानी ने प्रभावी पैरवी की।