*जिला स्तरीय कार्यक्रम वरुण सागर पर हुआ आयोजित*
*जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की एतिहासिक पहल- श्री भागीरथ चौधरी*
*जल एवं रक्त नही बनता कृत्रिम तरीके से, बचाव ही उपाय है- श्री रावत*
अजमेर, 25 मई। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर सोमवार को वरुण सागर पर वन्दे गंगा जल संरक्षण महाअभियान के जिला स्तरीय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा को लेकर समाज में जनजागरूकता उत्पन्न करना तथा इसे जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करना है। इसके समानान्तर उपखण्ड़, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत वरुण सागर की स्वच्छता के लिए श्रमदान से हुई। इसमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कार्मिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं आम नागरिकों ने भाग लिया। इसके पश्चात् जल की महत्ता को रेखांकित करते हुए जल पूजन एवं मंगल कलश यात्रा का आयोजन किया गया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत एवं जिले के प्रभारी सचिव श्री नीरज के. पवन की उपस्थिति में विधिवत रूप से जल पूजन किया गया तथा हरी झंडी दिखाकर कलश यात्रा को रवाना किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के माध्यम से यात्रा को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। इससे पूर्व विद्यार्थियों ने प्रभात फेरी निकालकर जल संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान पीपल पूजन, पौधारोपण एवं राजीविका प्रदर्शनी का अवलोकन भी अतिथियों द्वारा किया गया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना को साकार करने के लिए जन सहभागिता आवश्यक है। राजस्थान में रिकॉर्ड स्तर पर वृक्षारोपण हुआ है। गत 40 वर्षों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढ़ा है। राष्ट्र प्रथम के भाव से कार्य करें। स्वदेशी वस्तुएं उपयोग करनी चाहिए। भारत में बने उत्पाद गुणवत्ता की दृष्टि से सर्वोत्तम है।
उन्होंने कहा कि जल एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह अभियान एक अनुकरणीय प्रयास है। यह गांव से लेकर शहर तक जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने प्लास्टिक के प्रयोग से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए जनता से अपील की कि वे प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाएं। जल ही जीवन है और प्रकृति परमात्मा है। इसको केन्द्र में रखकर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा द्वारा जल संरक्षण महा अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को पवित्र मानते है। इस कारण जल बचाने की आदत है। बदली हुई जीवन शैली में जल बचाने की आदत डालना आवश्यक है। सभी को शुद्ध पेयजल मिलने से बिमारियां कम होगी। प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र प्रेम और देश को आगे बढ़ाने की भावना अभिव्यक्त होनी चाहिए। जल स्त्रोतों के रख रखाव का कार्य केवल सरकार नहीं रख सकती। इस प्रकार के कार्य आमजन के साथ आने से ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करते है।
जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि वरूण सागर में अब भी पर्याप्त जल है। इसकी जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए खुदाई के कार्यादेश जारी हो रहे है। इस अभियान के दौरान सभी नागरिकों को अपने आस-पास के जल स्त्रोतों को साफ करना चाहिए। जल स्त्रोतों का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार हमारी संस्कृति का भाग रहा है।
उन्होंने कहा कि जल बहाव तंत्र को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। जल प्रवाह को अवरूद्ध होने से बचाए जाने की आवश्यकता है। इसमें किए गए अतिक्रमणों को चिन्हित कर हटाया जाना चाहिए। जल जीवन के लिए अमृत है। इसका संरक्षण आवश्यक है। जल एवं रक्त का निर्माण कृत्रिम तरीके से नहीं हो सकता है। इसलिए इनका सदुपयोग किया जाए।
जिला कलक्टर श्री लोकबंधु द्वारा उपस्थित नागरिकों को जल संरक्षण, विवेकपूर्ण जल उपयोग, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्त्रोतों के संरक्षण एवं प्लास्टिक मुक्त जीवन शैली अपनाने की शपथ दिलाई गई। नागरिकों ने जल है तो कल है के संकल्प को आत्मसात करने की शपथ ली। जल का संरक्षण विवेकपूर्ण तरीके से करने, अपव्यय रोकने, जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने, वर्षा जल संग्रह एवं संरक्षण करने, पारंपरिक जल स्त्रोतों के संरक्षण तथा पूनर्जीवन में सहयोग करने, भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जल संचय करने सहित विभिन्न अभियानों में सहयोग देने का संकल्प लिया गया।
उन्होंने कहा कि यह अभियान जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्वास्थ्य, और सामाजिक चेतना का समग्र प्रयास है। यह अभियान जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम सिद्ध होने के साथ भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की नींव भी रखेगा। इस अभियान में अनेक विभाग जैसे पंचायती राज, नरेगा, राजीविका आदि की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना के अंतर्गत निर्मित जल संरचनाओं का लोकार्पण किया जाएगा एवं पारंपरिक बावड़ियां, तालाबों आदि जल स्त्रोतों की पूजा एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर गोपाल बंजारा एवं उनके दल द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका ने जल एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश को प्रभावशाली ढंग से जनमानस तक पहुंचाया। इसके माध्यम से वृक्षारोपण से जीवन संवरता है और पेड़ काटने से भूखा रहना पडेगा का संदेश दिया गया। साथ ही जल पुनर्भरण, प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण तथा अतिक्रमण मुक्त जलस्त्रोतों के संदेश के साथ नाटिका मंचित हुई। श्री रामविलास जागिड़ ने पाणी ढ़ुळे तो जीवड़ो दोरो सहित राजस्थानी गीतों एवं झाला गायन का प्रस्तुतीकरण किया।
इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री राम प्रकाश, अजमेर विकास प्राधिकरण की आयुक्त श्रीमती नित्या के., मुख्य वन संरक्षक श्री अनूप के. आर., देहात अध्यक्ष श्री जीतमल प्रजापत, शहर अध्यक्ष श्री रमेश सोनी, पूर्व सभापति श्री कमल पाठक, अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री नरेन्द्र कुमार मीणा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।