योग से स्वस्थ, सक्रिय एवं संतुलित वृद्धावस्था संभव — डी. भानुदास

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के काउंटडाउन कार्यक्रमों के अंतर्गत विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी के महासचिव श्री डी. भानुदास ने “Yoga for Aging Gracefully” विषय पर अपना विशेष संदेश देते हुए कहा कि योग व्यक्ति को गरिमापूर्ण, स्वस्थ एवं संतुलित वृद्धावस्था प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल आयु बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक आयु को ऊर्जा, आनंद और आत्मिक संतुलन से परिपूर्ण बनाना है। श्री भानुदास ने कहा कि नियमित योगाभ्यास शरीर की लचीलापन, संतुलन एवं गतिशीलता को बनाए रखने में सहायक है। योग मांसपेशियों एवं जोड़ों को मजबूत बनाकर वृद्धावस्था में होने वाली शारीरिक समस्याओं तथा गिरने एवं चोट लगने की संभावनाओं को कम करता है। साथ ही यह हृदय एवं श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाता है। उन्होंने कहा कि योग मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। योग तनाव, चिंता एवं अवसाद को कम कर मानसिक शांति प्रदान करता है तथा स्मरण शक्ति, एकाग्रता एवं सकारात्मक सोच को विकसित करता है। वृद्धावस्था में होने वाले अकेलेपन एवं सामाजिक अलगाव को दूर करने में भी योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पतंजलि योगसूत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा — “हेयं दुःखमनागतम्” अर्थात भविष्य के दुःखों को रोका जा सकता है। नियमित योगाभ्यास आयु संबंधी अनेक शारीरिक एवं मानसिक चुनौतियों की रोकथाम में सहायक सिद्ध होता है। स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी विचार “Strength is life, weakness is death” का उल्लेख करते हुए श्री भानुदास ने कहा कि योग व्यक्ति को शारीरिक रूप से सशक्त, मानसिक रूप से सजग एवं आध्यात्मिक रूप से प्रेरित बनाता है। उन्होंने योग के माध्यम से “Graceful Aging” के चार प्रमुख आयामों — शारीरिक, प्राणिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास — पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आसन शरीर को सक्रिय एवं आत्मनिर्भर बनाए रखते हैं, प्राणायाम ऊर्जा एवं जीवनशक्ति को बढ़ाता है, ध्यान मानसिक शांति एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है तथा आध्यात्मिक साधना व्यक्ति को आत्मचिंतन, संतोष एवं जीवन के उद्देश्य से जोड़ती है। श्री भानुदास ने तप, स्वाध्याय एवं ईश्वर प्रणिधान जैसे योगिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि ये सिद्धांत व्यक्ति को वृद्धावस्था की चुनौतियों का सामना धैर्य, विवेक एवं शांति के साथ करने की शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता एवं पीढ़ियों के मध्य संवाद का भी सशक्त माध्यम है। योग समाज में सक्रिय, सकारात्मक एवं सार्थक सहभागिता को प्रोत्साहित करता है। अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

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