नंदोत्सव की उमंग में झूमा कथा पंडाल, छप्पन भोग की झांकी ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

“नन्द के आनंद भयो…” भजनों पर थिरके श्रद्धालु, वृंदावनमय हुआ ज्ञान विहार का श्री कल्याण जी मंदिर परिसर

केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी बोले— धर्म जोड़ता है समाज को, कथा श्रवण से मिलता है जीवन का सही मार्ग

अजमेर। ज्ञान विहार स्थित श्री कल्याण जी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को नंदोत्सव एवं छप्पन भोग महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की आनंदमयी स्मृतियों से सराबोर कथा पंडाल में जैसे ही अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने नंदोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया, सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालुजन “नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “यशोदा मैया दे दो बधाई” तथा “श्री गोवर्द्धन महाराज तेरे माथे तिलक विराज रहियो” जैसे मंगलमय भजनों पर झूम उठे तथा पूरा कथा स्थल वृंदावन की अनुभूति कराने लगा।

इस अवसर पर कथा श्रवण के लिए पधारे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि कथा श्रवण का अवसर मिलना स्वयं में सौभाग्य की बात है। धर्म समाज को जोड़ने का कार्य करता है तथा संतों की वाणी मनुष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और धर्म की शक्ति ही वास्तविक महाशक्ति है। उन्होंने कथा आयोजक कालीचरण-नरेंद्र कुमार खंडेलवाल परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से अजमेरवासियों को अमूल्य आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

अपने उद्बोधन में डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की खुशी में नंद बाबा अपनी सामर्थ्य से भी अधिक दान एवं उत्सव कर रहे थे। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के पाँचवें अध्याय के प्रथम से अठारहवें श्लोकों में नंदोत्सव का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। यदि किसी परिवार में मंगल कार्यों में बाधा आती हो तो इन श्लोकों का श्रद्धापूर्वक पाठ एवं अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है। उन्होंने कहा कि जो स्वयं आनंद में रहता है और दूसरों को भी आनंद प्रदान करता है, वही वास्तविक अर्थों में ‘नंद’ कहलाता है।

कथावाचन के दौरान महाराजश्री ने भगवान श्रीकृष्ण की विविध बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सामर्थ्य होने के बावजूद उसका सदुपयोग न करने वाला व्यक्ति अंततः अपने पुण्य और प्रतिष्ठा दोनों खो देता है। उन्होंने दान और उदारता का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि जो स्वयं भी ग्रहण करे और दूसरों को भी दे, वह दानी है, जबकि जो स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों का हित करे, वही उदार कहलाता है।

उन्होंने गौदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी शुभ कार्य की सिद्धि के लिए गौसेवा और गौदान का विशेष महत्व है। साथ ही उन्होंने प्रेरणा दी कि शुभ कार्यों को कभी टालना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध आध्यात्मिक उन्नति का आधार है तथा यदि गुरु शिष्य का त्याग कर दे तो उसका पतन निश्चित माना गया है। वास्तु दोष के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वृंदावन की पावन रज घर में लाकर श्रद्धापूर्वक स्थापित करने से सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

कथा प्रवक्ता उमेश गर्ग ने बताया कि कथा के अंतर्गत नंदोत्सव के साथ-साथ श्रीकृष्ण का वृंदावन आगमन, गोपियों का प्रेममय स्वागत, बलराम जी के नेत्रों की ज्योति प्राप्ति, पूतना मोक्ष, कन्हैया के मुख में ब्रह्मांड दर्शन, नामकरण संस्कार, माखन चोरी, वस्त्र हरण, मानसी गंगा की उत्पत्ति और गिरिराज पूजन जैसे दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण विवेचन किया गया। उन्होंने बताया कि आगामी कथा में महारास एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंगों का रसपूर्ण वर्णन किया जाएगा।

— उमेश गर्ग
मो.: 98297 93705

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