भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत एमडीएस विश्वविद्यालय की अहम पहल
अजमेर। किताबी शिक्षा से आगे बढ़कर महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत संस्कार, नेतृत्व और राष्ट्र चेतना को पढ़ाई का हिस्सा बनाने जा रहा है | राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में उच्च शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और व्यवहारिक अधिगम से जोड़ने की एक महत्त्वपूर्ण पहल करते हुए महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने अभिनव वैल्यू एडेड कोर्स (Value Added Courses) विकसित किए हैं। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में तैयार किए गए ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें संवेदनशील, उत्तरदायी, मूल्यनिष्ठ, राष्ट्रचेतस एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक नागरिक बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के साथ-साथ उसे भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, अनुभवात्मक अधिगम, बहुविषयक दृष्टिकोण तथा समाजोपयोगी शिक्षा से जोड़ना है। इसी सोच को साकार रूप देते हुए विश्वविद्यालय ने ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए हैं, जिनमें भारतीय दर्शन, संस्कृति, पर्यावरण, लोकतांत्रिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत, सेवा, नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यवहारिक जीवन कौशल का प्रभावी समन्वय किया गया है। यह पहल पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित शिक्षा से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ने वाली शिक्षण प्रणाली का सशक्त उदाहरण है।
विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए इन वैल्यू एडेड कोर्सों की विशेषता यह है कि इनमें Indian Knowledge Systems (भारतीय ज्ञान परंपरा), Value Education (मूल्य शिक्षा), Experiential Learning (अनुभवात्मक अधिगम), Field Visits (क्षेत्रीय भ्रमण), Community Engagement (सामुदायिक सहभागिता), Ethical Leadership (नैतिक नेतृत्व), Environmental Awareness (पर्यावरणीय चेतना), Democratic Values (लोकतांत्रिक मूल्य), Heritage Conservation (विरासत संरक्षण), Life Skills (जीवन कौशल) तथा Nation Building (राष्ट्र निर्माण) जैसे आयामों को एकीकृत किया गया है। इससे विद्यार्थियों में केवल विषय ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रति व्यापक दृष्टिकोण विकसित होगा।
इसी क्रम में विकसित “कर्मयोग : समग्र व्यक्तित्व विकास एवं जीवन उत्कृष्टता” पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता में प्रतिपादित कर्मयोग के सिद्धांतों से परिचित कराते हुए कर्तव्यनिष्ठा, आत्मानुशासन, नैतिक निर्णय क्षमता, भावनात्मक संतुलन, नेतृत्व कौशल तथा समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के साथ सेवा, उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को व्यवहार में उतारने की दिशा प्रदान करेगा।
“प्रकृति बोध” पाठ्यक्रम भारतीय संस्कृति में निहित पर्यावरणीय दृष्टिकोण को आधुनिक सतत विकास की अवधारणा से जोड़ता है। पंचमहाभूत, ऋत, वसुधैव कुटुम्बकम, जल संरक्षण, जैव विविधता, पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान तथा प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व जैसे विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यवहारिक संवेदनशीलता विकसित की जाएगी।
लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से तैयार “मतदान संस्कार” पाठ्यक्रम युवाओं में निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता अधिकार एवं कर्तव्यों, निर्वाचन आयोग की भूमिका, नैतिक मतदान तथा सक्रिय नागरिकता के प्रति जागरूकता विकसित करेगा। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को लोकतंत्र में जागरूक एवं उत्तरदायी भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाएगा।
राजस्थान की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझाने हेतु तैयार “तीर्थराज पुष्कर : भारत के पवित्र सांस्कृतिक भूगोल में” पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को पुष्कर के धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, स्थापत्य एवं पारिस्थितिक महत्व से परिचित कराएगा। इसके माध्यम से विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, लोक परंपराओं तथा सतत विकास के प्रति व्यवहारिक समझ विकसित होगी। क्षेत्रीय भ्रमण एवं विरासत प्रलेखन इस पाठ्यक्रम की विशेष पहचान होंगे।
विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े महान समाज सुधारक के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से विकसित “महर्षि दयानंद सरस्वती का वैदिक दृष्टिकोण” पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद के जीवन, वैदिक दर्शन, सामाजिक एवं शैक्षिक सुधार, स्त्री शिक्षा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय जागरण तथा तर्कशील चिंतन से परिचित कराएगा। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में नैतिक नेतृत्व, आलोचनात्मक चिंतन और भारतीय पुनर्जागरण की समझ विकसित करेगा।
इन पाठ्यक्रमों की एक अन्य उल्लेखनीय विशेषता इनकी नवाचारपूर्ण मूल्यांकन प्रणाली है। विश्वविद्यालय ने केवल पारंपरिक लिखित परीक्षा पर आधारित मूल्यांकन की बजाय अनुभवात्मक एवं सतत मूल्यांकन मॉडल अपनाया है। विद्यार्थियों का आकलन फील्ड विजिट, परियोजना कार्य, सामुदायिक सहभागिता, सर्वेक्षण, रिपोर्ट लेखन, प्रलेखन, समूह चर्चा, पोस्टर प्रस्तुति, सेमिनार, केस स्टडी, प्रस्तुतिकरण तथा सहभागिता के आधार पर किया जाएगा। इससे शिक्षा केवल सैद्धांतिक न रहकर व्यवहारिक, कौशल आधारित और परिणामोन्मुख बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वैल्यू एडेड कोर्स विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होंगे। इनसे उनमें नैतिक मूल्यों का विकास, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संप्रेषण कौशल, टीमवर्क, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, निर्णय क्षमता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व, लोकतांत्रिक चेतना, सांस्कृतिक आत्मबोध तथा रोजगारपरक दक्षताओं का विकास होगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य में ऐसे बहुआयामी कौशल विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में अधिक सक्षम बनाएंगे।
उच्च शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस मूल भावना को मूर्त रूप देती है जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुविषयक शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम, परिणाम आधारित शिक्षा, मूल्य आधारित शिक्षण और राष्ट्र निर्माण को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया गया है। इस दृष्टि से महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर का यह प्रयास देश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा, “विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल उपाधियाँ प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी नागरिक, नैतिक नेतृत्वकर्ता और सामाजिक चेतना से परिपूर्ण युवा तैयार करना है जो अपने ज्ञान, चरित्र और सेवा भाव से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी परिवर्तनकारी सोच का आधार है और हमारे वैल्यू एडेड कोर्स विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों, व्यावहारिक दक्षताओं और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेंगे।”
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर द्वारा प्रारम्भ की गई यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि भविष्य की उच्च शिक्षा केवल पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जीवनोपयोगी ज्ञान, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सामाजिक सहभागिता और व्यवहारिक अनुभवों पर आधारित होगी। नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विकसित ये वैल्यू एडेड कोर्स आने वाले शैक्षणिक सत्रों में हजारों विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा भारतीय उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी, मूल्यपरक और राष्ट्रोन्मुख बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।