डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों से प्रेरित होकर विश्वविद्यालय परिवार राष्ट्र निर्माण में निभाए सक्रिय भूमिका : कुलगुरु प्रो. अग्रवाल
“हर शिक्षक और कर्मचारी अपने कार्यस्थल की एक कमी दूर करने का संकल्प ले”
अजमेर, 6 जुलाई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में सोमवार को आयोजित साप्ताहिक प्रार्थना सभा में भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं संविधान सभा के सदस्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने विश्वविद्यालय परिवार को राष्ट्र निर्माण, कर्तव्यनिष्ठा और संस्थागत विकास के लिए संकल्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में कुलगुरु ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्वों का निर्वहन केवल कर्तव्य के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा के माध्यम के रूप में करे। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे वर्ष 2026-27 के लिए व्यक्तिगत एवं संस्थागत विकास के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें तथा यह संकल्प लें कि अपने कार्यक्षेत्र में दिखाई देने वाली कम से कम एक कमी को दूर करने का प्रयास अवश्य करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन योजनाएँ थोपने के बजाय प्रत्येक कर्मचारी और शिक्षक की रचनात्मक सहभागिता से विकास की संस्कृति विकसित करना चाहता है। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक शक्ति उसके मानव संसाधन की सकारात्मक सोच, अनुशासन और कार्य संस्कृति में निहित होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्य के प्रति उत्तरदायित्व और समर्पण की भावना से कार्य करे तो विश्वविद्यालय नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।
कुलगुरु ने विश्वविद्यालय में प्रत्येक सोमवार आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा को आत्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता और आपसी संवाद का सशक्त माध्यम बताते हुए सभी से इसमें स्वप्रेरणा से सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ पूरे दिन के कार्यों को ऊर्जा और एकाग्रता के साथ सम्पन्न करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सभी कार्मिकों से यह भी आह्वान किया कि वे प्रतिदिन यह संकल्प लेकर कार्यस्थल पर आएँ कि दिनभर के लंबित कार्यों को पूर्ण करेंगे तथा किसी भी व्यक्ति के कार्य में जानबूझकर बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे।
प्रो. अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के आगामी स्थापना दिवस समारोह को नवाचारपूर्ण एवं जनसहभागिता आधारित स्वरूप में आयोजित करने की मंशा व्यक्त करते हुए सभी से सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने कहा कि पूर्व वर्षों की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी समारोह का शुभारम्भ वैदिक हवन एवं यज्ञ के साथ किया जाएगा तथा विश्वविद्यालय परिवार का प्रयास रहेगा कि इस अवसर पर कुलाधिपति एवं माननीय राज्यपाल महोदय का मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त हो। शैक्षणिक गतिविधियों के संदर्भ में कुलगुरु ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए व्यापक ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित करने पर बल देते हुए कहा कि छात्रों को केवल विभागों से ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिसर, प्रशासनिक इकाइयों, छात्रावासों, अतिथि गृहों तथा उपलब्ध सुविधाओं से भी परिचित कराया जाना चाहिए। उन्होंने विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभागों से परिसर में स्थित वृक्षों और जैव विविधता के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता विकसित करने का भी आग्रह किया।
पर्यावरण संरक्षण के विषय पर उन्होंने कहा कि वृक्षों के संरक्षण और उनकी आयु संबंधी वैज्ञानिक अध्ययन आज की आवश्यकता है तथा आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए संभावित जोखिमों का समय रहते समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी पहलें ही भविष्य में बड़े और दूरगामी परिणामों का आधार बनती हैं। कुलगुरु ने विश्वविद्यालय में अधिकाधिक प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों से सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान उसके शैक्षणिक वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों की संख्या से निर्मित होती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय हित में लाई जाने वाली प्रत्येक रचनात्मक योजना और नवाचार को उनका पूर्ण समर्थन प्राप्त होगा। अपने संबोधन के अंत में प्रो. अग्रवाल ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी, शिक्षक अथवा विद्यार्थी की कोई वास्तविक और न्यायसंगत समस्या कुलगुरु स्तर पर समाधान योग्य होगी तो उसका निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने इसे केवल आश्वासन नहीं बल्कि विश्वविद्यालय परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और संकल्प बताया।
प्रार्थना सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रनिष्ठ, कर्मयोगी और समर्पित जीवन से प्रेरणा लेते हुए विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता, नवाचार और राष्ट्रीय मूल्यों का केंद्र बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।