मानव सेवा ही माधव सेवा है का दिया संदेश
अजमेर 10 जुलाई। संत शिरोमणि स्वामी ईसरदास ने आज कोटड़ा स्थित ताराचंद हुंदलदास खानचंदानी सेवा संस्थान् के श्री अमरापुर सेवाघर पहुँचकर वहाँ निवासरत वरिष्ठ नागरिकों भोजन प्रसाद व फल परोसकर समाज को मानव सेवा ही माधव सेवा है का प्रेरणादायी संदेश दिया।
इस अवसर पर स्वामी ईसरदास ने वृद्धजनों से आत्मीय संवाद किया, उनका कुशलक्षेम जाना तथा उन्हें फल एवं आवश्यक सामग्री भेंट कर सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता एवं बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका सम्मान, सेवा और स्नेह प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहाँ संस्कार, संवेदनशीलता और समृद्धि स्वतः विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की सच्ची आराधना केवल मंदिरों में पूजा-अर्चना करने से ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद, असहाय एवं वृद्धजनों की वृद्धाश्रम में निस्वार्थ सेवा करने से भी होती है। मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और यही वास्तविक ईश्वर-भक्ति का मार्ग है।
स्वामी जी ने समाज को आह्वान करते हुए कहा कि अपने परिवार एवं समाज के बुजुर्गों के प्रति सम्मान, प्रेम और सेवा का भाव रखें तथा समय-समय पर वृद्धाश्रमों में पहुँचकर वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय व्यतीत करें। यही सच्चे अर्थों में मानवता की सेवा है।
वृद्धाश्रम के पदाधिकारियों ने स्वामी ईसरदास का स्वागत करते हुए उनके सेवा कार्यों की सराहना की तथा कहा कि ऐसे प्रेरक प्रयास समाज में सेवा, करुणा और संवेदनशीलता की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
इस अवसर पर दीपा टिकियानी, हैम्पी उदासी, चंदर नौतानी सहित ट्रस्टी व सेवाधारी उपस्थित थे।
कंवल प्रकाश किशनानी
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