विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के सतत प्रयासों से मिली वित्तीय स्वीकृत
झील की जलभराव क्षमता बढ़ेगी, जलभराव क्षमता बढ़ने से शहर को भी बड़ी राहत
अजमेर, 10 जुलाई। अजमेर शहर की आनासागर झील के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए झील की डीसिल्टिंग के लिए 10 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। इस कार्य के पूर्ण होने से झील की किनारों से गहराई लगभग एक मीटर तक बढ़ेगी। इससे इसकी जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और शहर को जलभराव की समस्या से भी बड़ी राहत मिलेगी। यह स्वीकृति विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
डीसिल्टिंग कार्य के तहत झील में सेवन वंडर्स क्षेत्र में भी खुदाई की जाएगी। इससे वर्षों से जमा गाद हटेगी और झील के किनारों से जलराशि स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकेगी। झील की प्राकृतिक सुंदरता में वृद्धि होने के साथ-साथ इसके जलग्रहण क्षेत्र और आवक मार्ग भी अधिक प्रभावी बनेंगे। इस परियोजना के पूरा होने से झील की जलभराव क्षमता बढ़ने के कारण मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी सुरक्षित रूप से झील में संग्रहित हो सकेगा। इससे पानी का अनावश्यक ओवरफ्लो कम होगा और आसपास की सड़कों एवं निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। साथ ही, अब झील का जल रीजनल कॉलेज चौपाटी क्षेत्र तक बेहतर ढंग से पहुंच सकेगा।
कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व विस्तृत सर्वे कराया जाएगा तथा पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर डीसिल्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि झील के जलीय जीव-जंतुओं, पक्षियों तथा प्राकृतिक पारिस्थितिकी पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। कार्य के दौरान जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का क्रियान्वयन जल संसाधन विभाग द्वारा कराया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने हाल ही में लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत से वरुण सागर सहित अन्य जलाशयों के आवक मार्गों की खुदाई एवं पुनस्र्थापन का कार्य भी प्रारंभ कराया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण एवं जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष बजट निर्धारित किया है।
विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि आनासागर झील केवल अजमेर की पहचान ही नहीं, बल्कि शहर की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक धरोहर भी है। झील की गहराई बढ़ने और गाद हटने से इसकी जलधारण क्षमता में वृद्धि होगी। जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना अजमेर के पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन और शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगी।