जयपुर, अगस्त 2026 : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रयान एडुनेशन स्कूल, जयपुर में कैप्टन चौहान फाउंडेशन ट्रस्ट के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए विशेष हथकरघा कार्यशाला आयोजित की गई। कक्षा 5 से आगे के विद्यार्थियों ने इस दौरान भारतीय हथकरघा परंपरा को करीब से समझा। कार्यशाला का संचालन सूत्रकार क्रिएशन्स, जयपुर की संस्थापक सुश्री नीरजा पलिसेट्टी ने किया।
कार्यशाला में पारंपरिक हथकरघे, चरखे, कताई उपकरण, धागे और हाथ से बुने कपड़ों का प्रदर्शन किया गया। सुश्री पलिसेट्टी ने विद्यार्थियों को धागा तैयार करने से लेकर करघे पर कपड़ा बुनने तक की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया। पोंडुरु, आंध्र प्रदेश की बुनाई परंपरा से जुड़े अपने पारिवारिक अनुभवों के आधार पर उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि हाथ से बुने वस्त्र तैयार करने में कौशल, धैर्य और सटीकता की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्यशाला में विद्यार्थियों को भारतीय हथकरघा परंपराओं के इतिहास और उन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित करने वाले कारीगर समुदायों की भूमिका से भी परिचित कराया गया। साथ ही, हथकरघे को भारतीय संस्कृति और पहचान से जोड़ते हुए सतत जीवनशैली, जिम्मेदार उपभोग और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण के महत्व पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और पारंपरिक उपकरणों एवं सामग्रियों को करीब से समझा।
रयान एडुनेशन स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. बहारुल इस्लाम ने कहा, “अनुभवात्मक शिक्षा विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ी बातों को वास्तविक जीवन से जोड़ने का अवसर देती है। भारतीय हथकरघा परंपरा को समझने से विद्यार्थियों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बढ़ता है। साथ ही वे शिल्प कौशल, स्थिरता और स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण का महत्व भी समझते हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और विरासत से जोड़ने के साथ उन्हें जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।