अजमेर, 13 अगस्त। जिले में आगामी पर्वों के दौरान मूर्ति विसर्जन पूर्ण आस्था तथा प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की मार्गदर्शिका के अनुसार किया जाना चाहिए।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की वरिष्ठ पर्यावरणीय अभिंयता निधि खण्डेलवाल ने बताया कि आगामी गणेश महोत्सव एवं दुर्गा महोत्सव-2026 के दौरान आमजन द्वारा जल कुण्डों तथा तालाबों में मूर्ति विसर्जन किया जाता है। जल स्त्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, नई दिल्ली द्वारा मूर्ति विसर्जन की मार्गदर्शिका जारी की गई है जो कि www.cpcb.nic.in पर उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि इस संशोधित मार्गदर्शिका में निर्देश प्रदान किए गए है कि मूर्ति के निर्माण के लिए प्राकृतिक मिट्टी एवं बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए। मूर्तियों की सजावट के लिए प्राकृतिक रंगो और बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। जल निकायों में विर्सजन के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) आधारित मुर्तियों की अनुमति नहीं दी जाए। ऎसी मूर्तियों को केवल अस्थाई तालाब तथा निर्धारित स्थान (निकायों द्वारा चिन्हित स्थान) पर ही विर्सजित किया जाना चाहिए। शहरी स्थानीय निकायों को मूर्तियों के विर्सजन के लिए किसी क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र के नजदीक अस्थाई विर्सजन तथा कृत्रिम तालाब बनाए जाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि त्यौहार समितियों और एनजीओ के सहयोग से गणेश चतुर्थी एवं दुर्गा पर्व के दौरान पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों के बारे में जागरूकता फैलाई जाए। त्यौहार समितियों और एनजीओ के सहयोग से सामुदायिक स्थानों, स्कूलों एवं कॉलेजों में पर्यावरण हितैषी मूर्तियों के निर्माण के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। नदियों के किनारे मूर्ति विर्सजन के दौरान संशोधित मार्गदर्शिका में सुरक्षा के लिए दिए गए दिशानिर्देशों की पालना सुनिश्चित होनी चाहिए।