अजमेर की पुरानी कोर्ट बिल्डिंग को खाली कराने की प्रक्रिया के विरोध में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पुरानी कोर्ट बिल्डिंग में वर्षों से चैंबर, बार एसोसिएशन का पुस्तकालय, मीटिंग हॉल, अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के चैंबर सहित अधिवक्ताओं से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण सुविधाएं संचालित हो रही हैं।
अधिवक्ताओं ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ‘पुरानी कोर्ट बिल्डिंग बचाओ संघर्ष समिति’ का गठन किया है। समिति द्वारा जिला बार एसोसिएशन को पत्र भेजकर विशेष जनरल हाउस बुलाने तथा सामूहिक रूप से निर्णय लेने की मांग की गई है।
अधिवक्ताओं का स्पष्ट मत है कि बिना सभी संबंधित अधिवक्ताओं की सहमति के पुरानी कोर्ट बिल्डिंग को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि चैंबर खाली किए जाते हैं और नई जगह पर चैंबरों का उचित विकल्प उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो इसका सीधा प्रभाव अधिवक्ताओं की कार्यप्रणाली और न्यायिक व्यवस्था पर पड़ेगा।
अधिवक्ताओं ने यह भी मांग उठाई है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले न्यायिक प्रक्रिया, अधिवक्ताओं के हितों तथा बार एसोसिएशन की वर्षों पुरानी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा जाए। उनका कहना है कि पुस्तकालय, मीटिंग हॉल, चैंबर एवं अन्य सुविधाओं को हटाने से पहले इनके वैकल्पिक इंतजाम सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
– पुरानी कोर्ट बिल्डिंग को बिना उचित वैकल्पिक व्यवस्था के खाली नहीं कराया जाए।
– अधिवक्ताओं के चैंबर एवं आवश्यक सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
– बार एसोसिएशन का विशेष जनरल हाउस बुलाकर सामूहिक निर्णय लिया जाए।
– पुस्तकालय, मीटिंग हॉल एवं अन्य सुविधाओं के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
– अंतिम निर्णय से पहले अधिवक्ताओं के हितों एवं न्यायिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
अधिवक्ताओं की एकजुट आवाज — पुरानी कोर्ट बिल्डिंग हमारी कार्यसंस्कृति और वर्षों की पहचान का हिस्सा है। अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हर उचित एवं लोकतांत्रिक मंच पर आवाज उठाई जाएगी।
राजेश टंडन
एडवोकेट, अजमेर
पूर्व उपाध्यक्ष, वरिष्ठ नागरिक कल्याण बोर्ड,
राजस्थान सरकार, जयपुर