सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक माथुर और सीनियर फिजिशियन डॉ दीपक सोगानी ने बताए आधुनिक इंसुलिन थेरेपी के लाभ
अजमेर, 10 सितम्बर()। किसी भी तरह की शल्यक्रिया चाहे वह हार्ट से संबंधित हो अथवा किडनी,प्रसूतावस्था हो अथवा ट्रोमा कारणों से हॉस्पिटल में भर्ती रोगियों के ऑपरेशन से पहले शुगर को नियंत्रित रखने के लिए आधुनिक ‘बेसल-बोलस रेजिमेन इंसुलिन थेरेपी कारगर है। शुगर बढ़ने के बाद इलाज करने के बजाय, इस इन्सुलिन के सही तालमेल के साथ इस्तेमाल से शुगर को पहले से ही कंट्रोल में रखा जा सकता है ताकि वह बढ़ने ही न पाए।
मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक माथुर और सीनियर फिजिशियन डॉ दीपक सोगानी ने बुधवार को अन्य चिकित्सा पेशेवरों के साथ अमेरिकन डायबिटिक एसोसिएशन 2026 की गाइड लाइन के अनुसार रोगियों के इलाज में शुगर नियंत्रण की आधुनिक इंसुलिन जानकारी साझा की।
‘बेसल-बोलस रेजिमेन के माध्यम से रिएक्टिव से प्रोएक्टिव साक्ष्य-आधारित डायबिटीज अनुकूलन में परिवर्तन’ विषय पर आयोजित इस सीएमई (निरंतर शिक्षा कार्यशाला) में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह तरीका अब पुराना हो गया है जबकि डायबिटीज का इलाज अक्सर शुगर बढ़ने पर उसे घटाने के लिए किया जाता था।
अब मरीज को बेसल और बोलस इन्सुलिन का सही कॉम्बिनेशन देकर उसे पहले से ही नियंत्रित रखा जा सकता है। इन्सुलिन के इस आधुनिक उपचार से शल्य क्रिया करने की अवस्था में मरीज की शुगर अचानक ऊपर-नीचे नहीं होती और वह पहले से ही (प्रोएक्टिव होकर) पूरी तरह कंट्रोल में रहती है, जिससे भविष्य में डायबिटीज से होने वाले नुकसानों से मरीज सुरक्षित रहता है।
डॉ विवेक माथुर ने कहा कि बेसल पूरे दिन (24 घंटे) शरीर में शुगर को बैकग्राउंड में कंट्रोल रखने के लिए दिन में एक या दो बार दिया जाने वाला लंबा असर करने वाला इन्सुलिन है। यह तब भी काम करता है जब रोगी खाली पेट होता है या सो रहा होता है। बोलस इंसुलिन खाना खाने के समय लिया जाने वाला और तुरंत असर करने वाला इन्सुलिन है, खाना खाने के बाद शुगर अचानक बढ़ती है, उसे यह तुरंत कंट्रोल करने की क्षमता रखता है।
सीनियर फिजिशियन डॉ दीपक सोगानी ने बताया कि शल्यक्रिया के लिए भर्ती रोगियों में डायबिटीज का इलाज बेहतरीन और सटीक बनाने की दृष्टि से कार्यशाला में आधुनिक तकनीक पर विचार रखे गए। ताकि मरीज का स्वास्थ्य सबसे अच्छा रहे। उन्होंने कहा कि डायबिटीज रोगियों के लिए उपलब्ध दवाइयों, इन्सुलिन की उपलब्धता और उनके प्रभाव के अलावा आधुनिक इंसुलिन का डायबिटीज रोगियों के किस स्तर पर, कितनी और कौन सी इंसुलिन काम ली जानी चाहिए इस पर भी चर्चा की गई। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेक माथुर ने हार्ट व किडनी सहित अन्य रोगों से पीड़ित भर्ती रोगियों के उपचार में इंसुलिन के सटीक इस्तेमाल व उससे होने वाले प्रभाव के बारे में भी विस्तार से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यशाला में सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ प्रीतम कोठारी व डॉ विवेक माथुर ने जिज्ञासावश अनेक सवाल भी रखे, डॉ दीपक सोगानी ने उनकी जिज्ञासा दूर की। कार्यशाला के प्रारंभ में हॉस्पिटल की वीपीओ डॉ विद्या दायमा ने विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ विवेक माथुर का परिचय दिया।