संवत्सरी महापर्व एवं गणेश चतुर्थी पर्व का विद्यालय में हुआ भव्य धार्मिक आयोजन

ब्यावर। श्री वर्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित श्री नृसिंह अग्रसेन जैन विद्यापीठ में आज संवत्सरी महापर्व एवं गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर संयुक्त रूप से धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को दोनों पर्वों के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराया गया तथा उनमें क्षमा, अहिंसा, शांति, सद्भाव एवं संस्कारों की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर स्वामी एवं प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी महाराज की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। पूजा-अर्चना के पश्चात विद्यालय परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने श्रद्धापूर्वक धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री रोशन जैन ने विद्यार्थियों को संवत्सरी महापर्व के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संवत्सरी जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि, संयम, अहिंसा एवं क्षमाभाव का संदेश देता है। इस अवसर पर व्यक्ति अपने वर्षभर के कार्यों का आत्मावलोकन करते हुए जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगता है तथा दूसरों को भी क्षमा करने की भावना रखता है।

संवत्सरी महापर्व की इसी पावन भावना के अंतर्गत विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने मन, वचन एवं कर्म से जाने-अनजाने में किसी को ठेस पहुँचाने अथवा कष्ट देने के लिए क्षमायाचना की। सभी ने आपसी प्रेम, मैत्री, सद्भाव एवं शांति की भावना के साथ जीवन में क्षमाभाव को अपनाने का संकल्प लिया। इसके पश्चात श्री रोशन जैन द्वारा मंगलिक का श्रवण कराया गया, जिससे विद्यालय का वातावरण आध्यात्मिक एवं धर्ममय हो गया।

कार्यक्रम के अगले चरण में मांसी मैडम ने विद्यार्थियों को गणेश चतुर्थी पर्व के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देव के रूप में स्मरण करते हुए बताया कि किसी भी शुभ कार्य से पूर्व भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है। उन्होंने विद्यार्थियों को गणेश चतुर्थी पर्व की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से अवगत कराया तथा इसे श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाने का संदेश दिया।

इस अवसर पर श्री वर्धमान शिक्षण समिति के मंत्री श्री डॉ. नरेंद्र पारख ने भी विद्यार्थियों को संवत्सरी महापर्व एवं गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अपने प्रेरणादायी विचारों से संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को क्षमा, अहिंसा, संयम, अनुशासन एवं सद्भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्व केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि वे हमें जीवन में अच्छे संस्कार एवं सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देते हैं।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. निवेदिता पाठक ने भी अपने संबोधन में दोनों पावन पर्वों के संयुक्त आयोजन को विद्यार्थियों के सर्वांगीण एवं संस्कारपूर्ण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है तथा उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं मानवीय संवेदनाओं का विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को क्षमाभाव, अहिंसा, प्रेम एवं सद्भाव को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के समापन चरण में विद्यार्थियों द्वारा मौन रैली निकाली गई। मौन रैली के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज को शांति, अहिंसा, क्षमा, सद्भाव एवं भाईचारे का संदेश दिया। अनुशासित एवं शांतिपूर्ण ढंग से निकाली गई रैली ने सभी का ध्यान आकर्षित किया और विद्यार्थियों ने अपने व्यवहार एवं संदेश के माध्यम से धार्मिक पर्वों की वास्तविक भावना को प्रस्तुत किया।

इस प्रकार संवत्सरी महापर्व की क्षमा एवं अहिंसा की भावना तथा गणेश चतुर्थी की श्रद्धा एवं भक्ति के सुंदर समन्वय के साथ आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं संस्कारपूर्ण रहा। कार्यक्रम ने विद्यालय परिसर में धार्मिक आस्था के साथ-साथ शांति, प्रेम, सद्भाव एवं मानवीय मूल्यों का वातावरण निर्मित किया।

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