चुनाव ड्यूटी और प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण विपरीत रूप से प्रभावित होता है विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र
मुख्य सचिव को लिखा पत्र

अजमेर, 16 सितम्बर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने राज्य में विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्र को समय पर नियमित करने के लिए राज्य सरकार से उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जिला प्रशासन और विश्वविद्यालयों के बीच स्थायी समन्वय तंत्र विकसित करने का आग्रह किया है। इस संबंध में उन्होंने राजस्थान के मुख्य सचिव को अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से पत्र भेजकर शैक्षणिक एवं परीक्षा गतिविधियों को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों के स्थायी समाधान की आवश्यकता जताई है।
कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने स्तर पर शैक्षणिक सत्र को समयबद्ध करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी प्रशासनिक परिस्थितियां हैं, जो बार-बार परीक्षा एवं अकादमिक कार्यक्रम को प्रभावित करती हैं। इनमें चुनाव एवं अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों के लिए महाविद्यालयों और मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों का अधिग्रहण, बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी तथा राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा कम समय के अंतराल पर परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया जाना प्रमुख हैं।
उन्होंने बताया कि चुनावों के दौरान कई बार महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के 70 से 80 प्रतिशत तक शिक्षण एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लग जाती है। इससे परीक्षा संचालन, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, परिणाम तैयार करने तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक प्रशासनिक कार्यों के लिए उपलब्ध मानव संसाधन अत्यंत सीमित हो जाता है। इसी प्रकार, सरकारी दायित्वों के लिए शिक्षण संस्थानों के अधिग्रहण से उनकी नियमित शैक्षणिक एवं परीक्षा गतिविधियां विपरीत रूप से प्रभावित होती हैं।
प्रो. अग्रवाल ने रेखांकित किया कि कई अवसरों पर विश्वविद्यालय द्वारा अपनी परीक्षाओं का कार्यक्रम पहले से निर्धारित और अधिसूचित किए जाने के बाद RPSC एवं राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की परीक्षाओं की तिथियां सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय को अपनी परीक्षाएं स्थगित अथवा पुनर्निर्धारित करनी पड़ती हैं। इसका प्रभाव केवल परीक्षा कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, परिणामों की घोषणा और अगले शैक्षणिक सत्र की गतिविधियों में भी क्रमिक विलंब होता है।
कुलगुरु ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां बार-बार उत्पन्न होने पर विश्वविद्यालय के लिए शैक्षणिक कैलेंडर को समय पर नियमित करना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ता है। परीक्षा और परिणामों में विलंब के कारण विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रवेश प्रक्रियाओं और रोजगार के अवसरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
मुख्य सचिव को भेजे पत्र में प्रो. अग्रवाल ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण परीक्षा अवधि के दौरान महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के अधिग्रहण को यथासंभव न्यूनतम रखा जाए। साथ ही, चुनाव ड्यूटी के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कर्मचारियों की तैनाती में भी ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे आवश्यक परीक्षा एवं शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हों।
उन्होंने RPSC एवं राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम और विश्वविद्यालयों द्वारा पहले से घोषित परीक्षा कार्यक्रम के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए पूर्व समन्वय और पर्याप्त अग्रिम सूचना की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग, RPSC, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जिला प्रशासन और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की एक स्थायी समन्वय व्यवस्था बनाए जाने की आवश्यकता बताई गई है।
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय सरकार के चुनावों और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक दायित्वों में सहयोग करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि विश्वविद्यालयों की परीक्षा व्यवस्था और आवश्यक शैक्षणिक मानव संसाधन उस समय उपलब्ध रहें, जब उनकी सबसे अधिक आवश्यकता हो।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सत्र की समयबद्धता केवल विश्वविद्यालय प्रशासन का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसलिए प्रशासनिक आवश्यकताओं और शैक्षणिक कैलेंडर के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना आवश्यक है।