कम में सुख, संतोष में ही सच्ची समृद्धि : विक्रांत शास्त्री

ऋषभायतन अध्यात्मधाम में दशलक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना
अजमेर, 24 सितम्बर। वैशाली नगर पेट्रोल पंप के पास स्थित ऋषभायतन जैन मंदिर (अध्यात्मधाम) में दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन गुरुवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर जिनेन्द्र अभिषेक के साथ नित्य-नियम पूजन, देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सोलह कारण पूजन, रत्नत्रय पूजन एवं उत्तम आकिंचन्य धर्म विधान का आयोजन हुआ। श्रावक-श्राविकाओं ने अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति की कामना की।
अध्यक्ष नरेश लुहाड़िया ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठानों में सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। पूजन कार्यक्रम पंडित सुनील धवल भोपाल के निर्देशन में मेघा लुहाड़िया एवं अल्का पाटनी के मधुर स्वरों के साथ भक्तिभाव से संपन्न हुआ।
प्रवक्ता विजय पांडया ने बताया कि पूजन के बाद शोलापुर से आए पंडित विक्रांत शास्त्री ने उत्तम आकिंचन्य धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखकर भौतिक वस्तुओं, पद, प्रतिष्ठा और अहंकार से मुक्त होकर सादगी एवं संतोष के साथ जीवन जीए, यही उत्तम आकिंचन्य धर्म है। कम में भी सुख है और संतोष में ही सच्ची समृद्धि है।
उन्होंने कहा कि वस्तु नहीं, बल्कि वस्तु के प्रति ममत्व ही परिग्रह है। परिग्रह दुख का कारण बनता है। मिथ्यात्व सबसे पहला परिग्रह है। आकिंचन्य का अर्थ समस्त ममत्व का त्याग तथा पर वस्तु में एकत्व बुद्धि और लीनता का अभाव है। उन्होंने कहा कि आकिंचन्य के बिना ब्रह्मचर्य संभव नहीं है।
युवाओं में धर्म के प्रति रुचि जगाने का आह्वान
संयोजक प्रकाश पांडया ने बताया कि रात्रि प्रवचन में पंडित विक्रांत शास्त्री ने युवाओं में धर्म के प्रति जागृति लाने के लिए छोटे-छोटे संस्कारों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। इसके बाद बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ों से अलग-अलग धार्मिक एवं ज्ञानवर्धक प्रश्न पूछे गए तथा विजेताओं को पारितोषिक प्रदान किए गए।
इस अवसर पर संजय सोनी, सुरेश गदिया, विजय पांडया, संजय दोसी, आवेश जैन, शेखर जैन, पारस सेठी, मनोज पाटनी, मनमोहन पाटनी, किशोर कासलीवाल, प्रणय जैन, प्रकाश पांड्या, संजय सेठी एवं सुभाष सोगानी सहित समाजजन उपस्थित रहे।
35 वर्षों से जारी है भजन संध्या की परंपरा
23 सितम्बर की रात्रि श्री दिगम्बर जैन संगीत मंडल अजमेर की ओर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक एवं पारंपरिक भजनों की प्रस्तुतियों से जिनालय का वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रो. विमल गंगवाल, संजय पहाड़िया, सुशील दोसी, सुभाष पाटनी, धनजी लुहाड़िया एवं वी.के. जैन सहित कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति दी। भजन मंडली द्वारा करीब 35 वर्षों से यह कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है।
मंत्री मनोज कासलीवाल ने बताया कि दशलक्षण पर्व के अंतिम दिवस शुक्रवार को जिनालय में स्थित मानस्तंभ की प्रतिमाओं का विशेष जिनेन्द्र अभिषेक किया जाएगा। वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विशेष पूजन-अर्चना के साथ गोला अर्पित किया जाएगा।
प्रेषक : विजय पांड्या, प्रवक्ता

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