रेणु बाला चौहान के कहानी संग्रह ‘अपराजिता’ का हुआ लोकार्पण

बीकानेर की समृद्ध साहित्यिक गतिविधियों के साक्षी महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम में वी.आर. फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित समारोह में सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी द्वारा प्रकाशित उपन्यासकार एवं कथाकार रेणु बाला चौहान के कहानी संग्रह ‘अपराजिता’ का शहर के साहित्यप्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
फाउंडेशन के अध्यक्ष विशाल सोलंकी ने मंचासीन अतिथियों एवं समारोह में उपस्थित सुधीजनों को स्वागत उद्बोधन दिया। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा लेखिका रेणु बाला चौहान की दूसरी कृति कहानी संग्रह ‘अपराजिता’ का लोकार्पण किया गया।
 डॉ. नमामी शंकर आचार्य ने कहानी संग्रह पर पत्रवाचन करते हुए संग्रह की प्रत्येक कहानी एवं उसके पात्रों की विशेषताओं को रेखांकित किया व कहा कि लेखिका ने आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई कहानियों के पात्रों का बेहतरीन चरित्र-चित्रण किया है।
पत्रवाचन के पश्चात कथाकार रेणु बाला चौहान ने अपने उद्बोधन में कहानी संग्रह के लेखन के दौरान हुए अनुभवों एवं घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहानियों के मूल कथानक, विचारों और भावों को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कहानी संग्रह लिखते समय उनके साथ कई नई घटनाएं भी घटित हुईं, जिनका उल्लेख पाठकों को कहानियों में मिलेगा।
 सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी के अध्यक्ष एवं प्रकाशक नदीम अहमद ‘नदीम’, तसनीम नदीम, इमरोज एवं राजेश शर्मा ने संस्था की ओर से लेखिका का सम्मान किया तथा अभिनंदन पत्र भेंट कर उन्हें कहानी संग्रह के लिए शुभकामनाएं दीं। अभिनंदन पत्र का वाचन अरमान नदीम ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री गोविन्द माथुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि अपने अनुभवों, विचारों और परिवेश को साहित्य की विभिन्न विधाओं में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जा सकता है, विशेषकर गद्य में। साहित्य निजी एवं सामाजिक संबंधों की अव्यक्त समस्याओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम है और लेखिका का यह कहानी संग्रह इस कसौटी पर खरा उतरता है।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार – स्तंभ लेखक बुलाकी शर्मा ने कहा कि रेणुबाला चौहान की कहानियां की विशेषता है कि वे पाठक के मन में औत्सुक्य भाव जगाए रखती हैं। कहानियों का कहनपन इतना सम्मोहक है कि पाठक को पूरी पढ़ने के लिए विवश कर देती हैं और पढ़ चुकने के बाद पाठक के मन में लम्बे समय तक प्रश्नाकुलता और बेचैनी बनी रहती है, यह कहानी की सार्थकता और सफलता है।
शर्मा ने कहा कि कथाकार रेणुबाला चौहान आसपास घटी घटनाओं की केवल दृष्टा नहीं, वरन उनकी सूक्ष्म अन्वेषक – विश्लेषक हैं।
विशिष्ट अतिथि श्री राजेन्द्र जोशी ने संग्रह की सभी कहानियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक महिला कहानीकार होते हुए भी लेखिका ने पुरुष पात्रों को भी संवेदनशीलता के साथ रेखांकित किया है, जो सामान्यतः कम देखने को मिलता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मेघना शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस कहानी संग्रह में लेखिका ने पात्रों का बेहद संवेदनशील चित्रण किया है। साथ ही कुछ कहानियों में पात्रों के अंतर्द्वंद्व को भी बहुत सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। संग्रह की सभी कहानियां सहज रूप से आत्मसात करने योग्य हैं। उन्होंने कहा कि लेखिका का उद्देश्य केवल कहानियां लिखना ही नहीं, बल्कि उनके प्रत्येक पात्र को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ना भी है।
मंच संचालन श्री संजय श्रीमाली नें किया |
कार्यक्रम के अंत में राजेन्द्र सिंह देपावत ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में कमल चौहान, पुखराज तंवर, कन्हैया लाल कच्छावा, सीताराम कच्छावा, कमल रंगा, डॉ. अजय जोशी, राजाराम स्वर्णकार, प्रेम व्यास, डॉ. बिंदु भसीन, मुकेश व्यास, डॉ. संध्या सक्सेना, डॉ. अनु पंवार, श्यामा व्यास, मनोज पुरोहित, ज़किया सुल्ताना, सुमन गहलोत, डॉ. प्रीति मोहता, डॉ. पंकज दाधीच, अरुणा त्यागी, निर्मला सांखला, डॉ. पल्लवी चौहान, डॉ. वंदना, डॉ. दीपाली, शीतल शर्मा, रेणु शर्मा, प्रमोद सुराणा, सुभागमल, डॉ. सुमन सोढ़ा, डॉ. ललित पुरोहित, सीए चंद्रकला, सुमित शर्मा, नवनीत पांडे, रवि शुक्ला, बुनियाद ज़हीन, कासिम बीकानेरी, फारूक चौहान, गौरीशंकर प्रजापत, गिरिराज खेरीवाल, योगेंद्र पुरोहित, हितेन्द्र मारू, भगवान सुथार, कजलूराम व्यास, प्रदीप कच्छावा, महेंद्र जोशी, गोपाल, रमेश मोदी, सांवर प्रजापत, जगदीश गहलोत, महावीर शर्मा सहित देविका, रिद्धिमा, सौरभ, दीपक एवं तन्वी उपस्थित रहे।

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