एक कलाकार हमेशा अपनी कला के माध्यम से अपनी सोच की अभिव्यक्ति करता है और समाज के सामने एक आईना प्रस्तुत करता है। ज्यादातर कलाकारों का पसंदीदा विषय राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता है, हालांकि इसकी वजह कुछ भी हो सकती है। कुछ कलाकार इसको अपनी ब्रश के जरिए कैनवस पर उतारते हैं तो कुछ अभिनय के जरिए इसको मंच पर उतारते हैं, तो वहीं कुछ अपनी बनाई मूर्तियों के जरिए इसको दुनिया के सामने लाते हैं। ऐसे ही दिल्ली के मूर्तिकार हैं गौतम भाटिया। इन्होंने भी अपनी कलाकृतियों के जरिए राजनीतिक व्यंग्य करने की जो कोशिश की है उसको लेकर वह राजनीति की टोपी पहनने वालों के निशाने पर आ सकते हैं।
दरअसल भाटिया ने कुछ कलाकृतियां बनाई हैं जो कई मायनों में बेहद खास हैं। इसमें कुछ नेताओं को टॉयलेट सीट के अंदर खड़े होकर कुछ बात करते दिखाया है। एक दूसरी कलाकृति में उन्होंने दो नेताओं को बात करते हुए दिखाया है। इनमें से एक पर लोकसभा और दूसरी पर राज्यसभा लिखा हुआ है। तीसरी कलाकृति में एक नेता को इस सीट पर बैठा हुआ दिखाया है।
अपनी इन अनूठी कलाकृतियों के जरिए भाटिया ने राजनेताओं की सच्चाई दर्शाने की कोशिश की है। उनका मानना है कि इन नेताओं की सच्चाई सामने आने के बाद हर कोई इनको फ्लश करना चाहेगा। वहीं इसके जरिए उन्होंने बताया है कि राजनीति किस कदर गंदगी में फंसी है। अपने ऊपर लगने वाले प्रतिबंध और अपने खिलाफ होने वाली एफआईआर से वह नावाकिफ नहीं हैं। इंडिया आर्ट फेयर में इन कलाकृतियों को शामिल किया गया है।
इनके प्रदर्शन के बाद लगने वाली कल्चरल इमरजेंसी की जानकारी रखने वाले भाटिया का मानना है कि भारत में ऐसी खुली सोच रखने वालों को दबाने वालों की कोई कमी नहीं है। इस लिहाज से भारत को वह पश्चिम देशों के मुकाबले कमतर आंकते हैं। वह कहते हैं कि इस मामले में भारत सही देश नहीं है।
भाटिया का कहना है कि अन्य देशों में कलाकार को अपनी अभिव्यक्ति करने की छूट होती है, जो वहां के लोगों को सोचने का एक नया नजरिया देते हैं, जिसकी भारत मे कमी देखी जाती है। उनका कहना है कि यहां पर कलाकार को हर वक्त अथॉरिटी के चैलेंज का सामना करना पड़ता है। यहां केवल गांधी और अंबेडकर तक ही सब कुछ सीमित है। उनका कहना है कि कलाकारों को अपनी बात कहने की छूट होनी चाहिए, जिससे वह अपना मैसेज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सके।
