पेरिस। सीरिया, चीन, ईरान, बहरीन और वियतनाम खुल्लमखुल्ला ऑनलाइन जासूसी करते हैं। मीडिया की निगरानी करने वाले आरएसएफ ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही।
‘एनीमीज ऑफ द इंटरनेट’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में पांच कंपनियों गामा, टोविकर, हैकिंग टीम, एमेसिस और ब्लू कोट का भी जिक्र है, जिन्हें डिजिटल युग का भाड़े का सैनिक बताया गया है। ये कंपनियां दमनकारी सरकारों की मदद कर रही थी। रिपोरटर्स सैंज फ्रंटियर्स [आरएसएफ] ने कहा कि सीरिया का अनुमान है कि 50 लाख इंटरनेट यूजर्स देश की पैमाने पर जासूसी कर रहे हैं। यह रिपोर्ट साइबर सेंसरशिप के खिलाफ विश्व दिवस पर रिलीज की गई है। इसके मुताबिक सीरिया में 22 पत्रकारों और 18 इंटरनेट यूजर्स को जेल की सजा हुई।
इंटरनेट पर नियंत्रण राष्ट्रपति बशर अल असद द्वारा स्थापित सीरियन कंप्यूटर सोसाइटी [एससीजी] समेत दो संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। यह संस्थाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियों की रिकॉर्डिग करती हैं और सीरिया में ई-मेल के आदान-प्रदान की कॉपी रखती हैं। दमिश्क ने विद्रोह शुरू होने के बाद 2011 में अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ऑनलाइन निगरानी को कड़ा कर दिया गया।
आरएसएफ के मुताबिक परमाणु प्रतिष्ठिनों के कंप्यूटरों पर कई साइबर हमले के बाद ईरान देसी इंटरनेट प्रणाली बनाने की प्रक्रिया में है। एप्लीकेशन और सर्विसेज जैसे ई-मेल, सर्च इंजन और सोशल नेटवर्क को सरकारी नियंत्रण के तहत विकसित करने का प्रस्ताव है। ताकि बड़े पैमाने पर निगरानी की अनुमति मिल सके। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में पिछले साल 20 इंटरनेट यूजर्स को जेल हुई जबकि एक की हत्या कर दी गई।
जहां तक चीन की बात है वहां की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल साम्राज्यों में से एक को संचालित करती है। कंपनियां या व्यक्ति विशेष सरकार नियंत्रित कंपनी से ब्राडबैंड की सुविधा लेते हैं। इंटरनेट की निगरानी के लिए 2003 से ग्रेट फायरवॉल ऑफ चाइना का इस्तेमाल किया जाता है। यह विदेशी साइट्स को फिल्टर करने के बाद उपयोग की अनुमति देता है।