यहां लाशें बिछ जाने पर भी नहीं होती कार्रवाई

after-a-deadly-collapse-in-mumbai-thousands-of-illegal-building-still-stand-in-delhi-and-mumbaiनई दिल्ली। अवैध निर्माण की बात आई है तो यह भी बता दें कि देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली में अधिक भ्रष्टाचार है और यहां कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही होती है, जबकि दिल्ली से व्यस्त माने जाने वाले शहर मुंबई में अवैध निर्माण के मामले में कार्रवाई की सख्त व्यवस्था है। वहां अवैध निर्माण के मामले में किसी की मौत पर अधिकारियों पर भी हत्या का मुकदमा दर्ज होता है।

ताजा मामले में मुंबई के ठाणे में इमारत गिरने से मरे 74 लोगों के हादसे में भी वहां की महानगर पालिका ने कार्रवाई के कठोर सबूत दिए हैं तथा नेताओं, बिल्डरों और निगम अधिकारियों का पूरा गठजोड़ उजागर कर दिया है। पुलिस ने यह भी पता लगा लिया है कि अवैध इमारत के निर्माण में किसे कितनी रिश्वत मिली थी?।

अब सवाल यह है कि दिल्ली में इतनी जांच क्यों नहीं होती? लोग चिल्ला-चिल्ला कर बिल्डर माफिया का नाम लेते हैं। मगर फिर भी किसी इमारत के गिरने पर लोग मर भी क्यों न जाएं मगर सीधे तौर पर पुलिस बिल्डर, किसी अधिकारी या नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करती। दिल्ली में किस तरह से निर्दोष लोगों की मौत पर भी राजनीति होती है और एजेंसियां एक दूसरे पर ही जिम्मेदारी डाल देती हैं।

हम आपको दो मामलों से रूबरू कराते हैं। एक मामला दिल्ली के ललिता पार्क का है और दूसरा मामला पिछले रविवार को मुंबई के ठाणे में गिरी इमारत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई का है।

मात्र पांच लोग निलंबित, चार बहाल:-

ललिता पार्क मामला:- 15 नवंबर 2010 को ललिता पार्क हादसे के बाद एमसीडी ने अपने पांच लोगों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ निलम्बन की कार्रवाई कर दी थी। इस कार्रवाई में एक ऐसे अभियंता को शामिल कर दिया गया था। जिसकी म़ृत्यु हो चुकी थी। उस समय ही नगर निगम की कार्रवाई पर उंगली उठी थी। इलाके में चर्चा थी कि 70 लोगों की लाशें भी एमसीडी और दिल्ली सरकार को शायद जगाने में कामयाब नहीं हो सकीं।

मगर उस समय लोग भौचक रहे गए जब कुछ माह बाद इस मामले की आई रिपोर्ट ऐसी उलझ गई कि सभी अभियंता साफ बच गए। क्योंकि यह तय ही नहीं हो सका कि इमारत किस अभियंता के समय बनी थी। जो अभियंता निलंबित किए गए थे ये वे अभियंता थे जिन्होंने अपने समय में इस इमारत के खिलाफ कार्रवाई की थी। ऐसे में चारों अभियंता भी इस मामले से छूट गए।

बाद में इस मामले की सीबीआइ जांच की मांग भी उठी। मगर कागजों में ही रह गई। इस तरह सभी अभियंता इस मामले में कठोर कार्रवाई से बच गए। सूत्रों का कहना है कि जिस बिल्डर ने ललिता पार्क में यह इमारत बनाई थी उसे अब भी खौफ नहीं है। अब वह अपने भाई के साथ मिलकर अवैध इमारतें बनाने का कार्य कर रहा है और यमुनापार में काफी सक्रिय है।

ठाणे का हादसा:- 7 अप्रैल 2013 को ठाणे में अवैध बिल्डिंग के गिरने से 74 लोगों के मारे जाने पर वहां की महानगर पालिका ने दोषी बिल्डर, ठाणे नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर व वहां की निगम पार्षद सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। दो पुलिस अधिकारियों को निलम्बित किए जाने की कार्रवाई की है। बिल्डरों के खिलाफ तो धारा 302 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। मुंबई पुलिस ने जांच के लिए दोषी लोगों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है, जिसमें पता चला है कि बिल्डरों ने अधिकारियों को रिश्वत दी थी।

ठाणे के मुंब्रा में ढहे इस अर्पाटमेंट को बनाने वाले बिल्डरों के पड़े छापों में मिले दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि कई स्तरों पर रिश्वत दी गई थी। जिसमें निगम अधिकारी, पुलिस और पार्षद लेते थे नियमित तौर पर रिश्वत। निलंबित निगम उपायुक्त के घर पर छापे में 5 लाख रुपये मिले और अहम दस्तावेज भी मिले। गिरफ्तार किए गए सभी नौ लोग 14 दिन के लिए जेल भेज दिए गए हैं।

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