राजीव गांधी जब राजनीति से दूर थे और इंडियन एयरलाइंस में पायलट थे तो उन्होंने संभवतया लड़ाकू विमान समझौते में बिचौलिये की भूमिका निभाई थी। आपातकाल के दौर में जॉर्ज फर्नाडीज ने भी अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए से वित्तीय मदद मांगी थी। व्हिसल ब्लोअर वेबसाइट विकिलीक्स ने आठवें दशक में भारत स्थित अमेरिकी दूतावास से अमेरिकी विदेश मंत्रालय को भेजी गई कूटनीतिक केबलों से यह रहस्योद्घाटन किया है। 1973-76 के दौर की इन केबलों को अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के नाम पर किसिंजर केबल कहा गया :
किसिंजर केबल:
21 अक्टूबर, 1975 : हमारी जानकारी में अभी तक इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी केवल पायलट ही थे, लेकिन पहली बार उनका नाम उद्यमी के रूप में भी सुना जा रहा है.. स्वीडिश सूचना के अनुसार, इंदिरा गांधी ब्रिटेन के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण उनके जगुआर को नहीं खरीदेंगी। यानी कि निर्णय मिराज और विग्गेन के बीच होगा।
1976 : हमारे स्वीडिश सहयोगी ने राजीव गांधी का बखान करते हुए कहा है कि उनका तकनीकी ज्ञान उच्च कोटि का है। यह संभव है, लेकिन एक ट्रांसपोर्ट पायलट के लड़ाकू विमान संबंधी तकनीकी दक्षता पर हमको संदेह है। हालांकि उनके पास इससे भी बढ़कर एक योग्यता है।
(पारिवारिक प्रभाव)
विकिलीक्स : गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक करने वाली वेबसाइट विकिलीक्स इससे पहले 2011 में अमेरिकी दूतावासों से भेजे गए करीब ढाई लाख संदेशों को जारी कर चुकी है। उनमें दुनिया के प्रमुख नेताओं के लिए टिप्पणी भी की गई थी। इसके संस्थापक जूलियन असांजे हैं।
फर्नाडीस का मामला:
28 नवंबर, 1975 : एक नवंबर को जॉर्ज फर्नाडीज ने फ्रेंच राजनयिक मनफ्रेड टरलाक से मुलाकात कर फ्रांस से मदद मांगी। उनके इंकार करने के बाद फर्नाडीज ने टरलाक से कहा कि क्या वह सीआइए संपर्को से मुलाकात करा सकते हैं तो राजनयिक ने कहा कि वह किसी को नहीं जानते। इस केबल में यह भी उल्लेख किया गया है कि आठ नवंबर को किसी ‘मिस गीता’ ने अमेरिकी दूतावास स्थित लेबर काउंसलर से संपर्क कर फर्नाडीज व अमेरिकी राजदूत के बीच मीटिंग कराने का आग्रह किया था। उनके निवेदन को ठुकरा दिया गया। 10 जून, 1976 को फर्नाडीज को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि इसके बाद अमेरिका ने उनमें विशेष रुचि दिखाई।
छह अगस्त, 1976 : वाशिंगटन से नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से जॉर्ज फर्नाडीज की वास्तविक स्थिति व उन पर लगे आरोपों के संबंध में जानकारी मांगी गई। अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर सार्वजनिक या निजी रूप से उनकी रिहाई के संबंध में भारतीय सरकार से अपील करने वाले थे, लेकिन उनके सलाहकारों ने ऐसा करने से रोका। उनका तर्क था कि इससे फर्नाडीज का केस खराब हो जाएगा और आपातकाल के हटने के बाद भी उनको रिहा नहीं किया जाएगा।
आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के घर में अमेरिकी जासूस था। जो अमेरिका को सारी सूचना देता था।
विकीलीक्स ने एक अमेरिकी केबल के हवाले से कहा है कि संजय गांधी ने वामपंथी विचार वाले दासमुंशी को ‘ठिकाने’ लगाने के लिए कांग्रेसी मुख्यमंत्री बंसीलाल, हेमवती नंदन बहुगुणा और पीसी सेठी का इस्तेमाल किया। दासमुंशी ने इस्तीफे से पहले अपने आप को बचाने के लिए इंदिरा गांधी से मुलाकात भी की लेकिन उन्हें वहां से कोई आश्वासन नहीं मिला और संजय अपनी मंशा में सफल रहे।