दीपक हत्याकांड: ‘मेरे पिता इसी तरह की मौत के काबिल थे’

deepak bhardwajनई दिल्ली। दीपक भारद्वाज हत्याकांड में पुलिस ने उनके छोटे बेटे नितेश भारद्वाज समेत 6 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर केस की गुत्थी सुलझा तो ली है। लेकिन पुलिस की कहानी में इतने अनसुलझे सवाल है जिसका जवाब पुलिस के पास नहीं है।

बीते 26 मार्च को वारदात के कुछ ही घंटे बाद जब पुलिस को कार के असली नंबर का पता लग गया। कार भी बरामद हो गई और शूटरों की भी पहचान हो गई तब पुलिस को आखिर केस की गुत्थी सुलझाने में 14 दिनों का वक्त क्यों लगा? शूटरों को यह पता नहीं था कि फार्म हाउस में गेट पर भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लिहाजा वे स्कोडा लॉरा कार में असली नंबर प्लेट लगाकर ही वारदात करने आ गए थे। वारदात के बाद भागने के दौरान सीसीटीवी कैमरे में कार के पीछे का नंबर प्लेट साफ साफ आ गया था। उक्त नंबर के आधार पर पुलिस ने जब परिवहन विभाग से पता किया तब कार के मालिक की पहचान हो गई। पुलिस टीम ने उक्त पते पर दबिश देकर शाम तक कार भी बरामद कर ली और शूटरों व वारदात में शामिल अन्य की भी पहचान कर ली गई। तब भी पुलिस को गुत्थी सुलझाने में 14 दिन लग गए।

पुलिस अधिकारी की मानें तो उन्होंने कहा कि कॉल डिटेल से घटना के अगले ही दिन आरोपियों के बारे में पता लग गया था कि कौन-कौन लोग वारदात में शामिल हो सकते हैं। तब नितेश व बलजीत को गिरफ्तार करने में इतना देरी क्यों लगा? जबकि स्वामी प्रतिभानंद तो अभी पकड़ा भी नहीं गया है। आखिर किस किसके बयान व सबूत के आधार पर अब जाकर दोनों को गिरफ्तार किया गया? पुलिस तो पहले कहती रही कि प्रतिभानंद के पकड़े जाने के बाद ही उससे पूछताछ से खुलासा हो सकेगा कि साजिश में कौन-कौन लोग हैं। अगर पुलिस के पास कॉल डिटेल थी और घटना के बाद से इनसे लगातार पूछताछ की जा रही थी तब इन्हें गिरफ्तार करने में वक्त क्यों लगा? क्या इसे पुलिस की भारी असफलता व बड़ी लापरवाही नहीं माना जाए? जब साजिश में नितेश के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों का हाथ नहीं है तब भारद्वाज के बडे़ बेटे हितेश व पत्नी रमेश कुमारी को क्लीन चिट क्यों नहीं दिया जा रहा है? उनसे अभी भी क्यों पूछताछ की जा रही है? अगर इनकी भी संलिप्तता है तो इसका पता क्यों नहीं चल पा रहा है? हत्याकांड में एक महिला से लिंक होने की चर्चा जोरों पर है। पुलिस न तो उसकी पुष्टि कर रही है और न ही खंडन कर रही है ऐसा क्यों? अभी भी दर्जनों लोगों जिन्हें हिरासत में रखा गया है उनकी भूमिका को क्यों उजागर नहीं किया जा रहा है? अगर उनकी संलिप्तता नहीं है तो क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है? भारद्वाज की हत्या के तीन दिन बाद ही अपराध शाखा ने शूटर पुरुषोत्तम राणा के साले प्रदीप को एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर दक्षिण जिला को सौंप दिया था। उसे अब तक न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही छोड़ा जा रहा है।

जिला पुलिस व पुलिस मुख्यालय में बैठे आला अधिकारी के बयान में विरोधाभास क्यों है? मंगलवार को संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि नितेश, बलजीत व बलजीत के दोस्त नीरज को साजिश रचने में गिरफ्तार किया गया है। जबकि डीसीपी ने उनके बयान का खंडन कर दिया। उन्होंने कहा कि केवल नितेश व बलजीत सिंह को ही गिरफ्तार किया गया है। आखिर नीरज का क्या रोल है?

तलाक लेना चाहते थे भारद्वाज

अरबों की संपत्ति होने के बावजूद जब दीपक भारद्वाज ने दोनों बेटे व यहां तक कि पत्नी को भी अलग कर दिया तब इनके मन मुटाव बढ़ना शुरू हो गया था। छह महीने पूर्व दीपक ने बच्चों व पत्नी के लिए ऐसे हालात पैदा कर दिए थे कि सभी बेहद तनाव के दौर से गुजर रहे थे। पहले तो भारद्वाज ने द्वारका सेक्टर 22 में शिक्षा भारती स्कूल खोल छोटे बेटे नितेश व पत्नी को रमेश कुमारी को स्कूल की देखरेख करने का जिम्मा सौंप दिया और उन्हें उसी इलाके में रहने को कहा, जिससे मां-बेटे ने द्वारका सेक्टर 7 स्थित नव संसद अपार्टमेंट में रहकर स्कूल की आमदनी से गुजर बसर करने लगे। बाद में इन्होंने नितेश को रजोकरी स्थित फार्म हाउस पर भी आने पर प्रतिबिंध लगा दिया और एक तरह से नाता रिश्ता तोड़ लिया था। एक बार नितेश जब फार्म हाउस पर गया था तब गेट पर मुस्तैद सुरक्षा गार्ड ने उसे अंदर जाने से रोक दिया था, जिससे उसे वापस द्वारका लौटना पड़ा था। रमेश कुमारी शिक्षा भारती स्कूल की कोषाध्यक्ष है। भारद्वाज चाहते थे कि रमेश कुमारी कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दे। इन्होंने रमेश कुमारी पर इसके लिए दबाव भी बनाया था। यह खुद स्कूल का चेयरमैन बन कर वहां से भी नितेश व पत्नी को बेदखल करना चाह रहे थे। नितेश का कहना है कि उसके पिता इसी तरह की मौत के काबिल थे। उसके मुताबिक वह खुद 30 एकड़ के फार्म हाऊस में रहते थे और हमें मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के एक फ्लैट में रहना पड़ रहा था। बेटे को यह भी शक था कि दीपक की सारी प्रॉपर्टी कोई महिला हड़प लेगी।

छह महीने पूर्व दीपक ने एक अधिवक्ता से पत्नी से तलाक दिलाने को कहा। अधिवक्ता नितेश को भी जानता था जिससे उसने तलाक का केस फाइल न कर इस बात की जानकारी नितेश को दे दी थी।

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