बेटे ने ही कराई अरबपति दीपक भारद्वाज की हत्या

deepak bhardwaj sonनई दिल्ली। बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके अरबपति बिल्डर दीपक भारद्वाज की हत्या उनके छोटे बेटे नितेश ने ही कराई थी। पिता के व्यवहार से परेशान होकर व संपत्ति के लालच में नितेश ने अपने पारिवारिक वकील बलजीत सिंह सहरावत के साथ मिलकर साजिश रची थी। उसने वकील को पिता की हत्या के लिए पांच करोड़ की सुपारी दी।

इसके बाद सहरावत ने फरार चल रहे महंत प्रतिभानंद को दो करोड़ की सुपारी दी। फिर प्रतिभानंद ने अपने ड्राइवर पुरुषोत्तम को एक करोड़ की सुपारी देकर बिल्डर की हत्या करवा दी। करीब दो हफ्ते से मामले की छानबीन में जुटी दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को यह खुलासा कर नितेश को गिरफ्तार कर लिया।

डीसीपी दक्षिण जिला छाया शर्मा ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि फिलहाल फरार महंत का कोई सुराग नहीं लग पाया है। बिल्डर दीपक भारद्वाज ने दोनों बेटों हितेश, नितेश और पत्‍‌नी रमेश कुमारी को अलग कर रखा था। वह नहीं चाहते थे कि ये लोग उनके फार्म हाउस पर आएं। उन्होंने नितेश को चेतावनी भी दे रखी थी कि अगर वह कभी फार्म हाउस पर देखा गया तो परिणाम अच्छा नहीं होगा। पिता के व्यवहार से दुखी होकर नितेश ने पांच महीने पहले उनकी हत्या कराने की ठान ली थी। आरोपी वकील बलजीत को पुलिस सोमवार को ही गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा शूटर पुरुषोत्तम समेत चार लोग पहले ही पकड़ जा चुके हैं। डीसीपी ने हत्या के पीछे प्रॉपर्टी विवाद तो बताया किंतु पिता व बेटे के बीच किस तरह का विवाद था, इसका खुलासा नहीं किया।

वकील ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

डीसीपी छाया शर्मा ने बताया नितेश मां रमेश कुमारी के साथ द्वारका सेक्टर 22 स्थित अपार्टमेंट में रहता है। दोनों शिक्षा भारती स्कूल चलाते हैं। रमेश कुमारी स्कूल की प्रधानाचार्य हैं। शुरू में पिता से इसके अच्छे रिश्ते थे, जिससे रजोकरी वाले फार्म हाउस व होटल को इसी का नाम दे रखा है। बाद में भारद्वाज ने नितेश को रजोकरी वाले फार्म हाउस पर आने से मना कर दिया था। बड़े बेटे को उन्होंने पहले ही अलग कर रखा था।

दुखी नितेश ने पांच महीने पूर्व वकील बलजीत सिंह सहरावत से पिता के बारे में जिक्र किया। वकील ने नितेश से कहा कि वह चुनाव लड़ना चाह रहा है। अगर वह चुनाव में उसकी फंडिंग कर देता है तो वह उसका काम करा देगा। नितेश ने इसके लिए पांच करोड़ की हामी भरी। उसने बलजीत को 50 लाख एडवांस दिए। उसके बाद बलजीत ने महंत के माध्यम से घटनाक्रम को अंजाम दिया।

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