नेता बनना है तो लीजिए प्रशिक्षण

want-to-become-leader-get-training-hereनई दिल्ली। अगर आप चुनाव लड़ना चाहते हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है। राजनीति के बारे में ए,बी,सी,डी की समक्ष नहीं होने के बावजूद राजधानी में चंद महीने पहले खुले प्रशिक्षण संस्थानों का दावा है कि वे न केवल अपने यहां प्रशिक्षण हासिल करने वालों को पूरी तरह प्रशिक्षित करेंगे, बल्कि उम्मीदवारों को राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टी या फिर किसी राज्य स्तर की पार्टी से टिकट दिलाने में मदद भी करेंगे। चूंकि नेता बनने के लिए संविधान में किसी शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान नहीं है

इसलिए संस्थान ने भी इसे अधिक तवज्जो नहीं दिया है। इनका दावा है कि वह नेता हरेक उस शख्स को बना सकते हैं जो दाखिले से पूर्व संस्थान द्वारा लिए जाने वाले साक्षात्कार को पास कर लेगा।

चंद महीने बाद दिल्ली विधानसभा का चुनाव होना है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों से लेकर राजनेता बनने के इच्छुक आम लोगों में इस तरह के प्रशिक्षण संस्थान को लेकर चर्चा जोरों से हो रही है। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराने के लिए एशिक्षण संस्थान छात्रों के लिए जिस प्रकार पाठ्यक्रम बनाता है और फिर उसी के अनुसार क्लास आयोजित कर उन्हें व्यवहारिक व प्रायोगिक बातें बताई जाती हैं, राजनेता बनाने वाले संस्थान ने कमोबेश इसी के अनुसार पाठ्यक्रम बनाया है।

पूर्वी दिल्ली में राजनेता तैयार करने वाले संस्थान का दावा है कि उनके यहां चयनित लोगों की काबिलियत देख छह माह, एक वर्ष और दो वर्ष तक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद वह नेता बनने के सारे हुनर सीख जाते हैं।

चुनाव लोकतंत्र का महापर्व होता है। जाहिर है जो प्रत्याशी इस मैदान में अपनी किस्मत आजमाने उतरते हैं उनके लिए इस महापर्व को मनाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में प्रत्याशियों को सफल रूप से मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी कुछ मैनेज करना पड़ता है। जिसे मैनेज करने की जिम्मेदारी संस्थान भी लेती है। चुनाव प्रचार किस प्रकार हो, कार्यकर्ताओं को कैसे संगठित करें, अगर कहीं कोई सभा करनी है तो वहां कैसे भीड़ एकत्रित हो, जो कार्यकर्ता दिनभर घूम-घूम कर नेताजी जिंदाबाद का नारा लगाते हैं उनके लिए खाने-पीने का प्रबंध और सबसे अहम जो जनता वोट देती है उसका दिल जीतने समेत अन्य कई काम होते हैं जो चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को विशेष रूप से मैनेज करने पड़ते हैं। संस्थान में इन सबका प्रशिक्षण देने के लिए समय-समय पर बड़े राजनेता व उनके सलाहकारों को भी बुलाया जाता है। लेकिन ये बातें उनकी इच्छा से ही सार्वजनिक की जाती है।

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