नई दिल्ली। कोयला घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दाखिल सीबीआइ निदेशक के हलफनामे के बाद सरकार की साख पर कालिख और गहरा गई है। सीबीआइ की स्वायत्ता पर उठ रहे सवालों को पुख्ता करते हुए जांच एजेंसी के निदेशक रंजीत सिन्हा ने स्वीकार किया कि उन्होंने कोयला घोटाले की जांच की प्रगति रपट कानून मंत्री अश्विनी कुमार के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर उन्हें दिखाई। पहले से ही हमलावर विपक्ष ने इसके बाद से सरकार पर जोरदार हल्ला बोला और कानून मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री के इस्तीफे की संसद के दोनों सदनों में मांग की। हंगामे के चलते चौथे दिन भी संसद की कार्यवाही नहीं चल सकी। वहीं, सीबीआइ निदेशक के हलफनामे से अपने लिए राहत का रास्ता ढूंढ़ते हुए सरकार ने विपक्ष की मांग को फिलहाल खारिज कर दिया और कहा कि अश्विनी कुमार इस्तीफा नहीं देंगे।
सरकार और कांग्रेस ने भले ही आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है, लेकिन विपक्ष सरकार का गिरेबां छोड़ने को तैयार नहीं है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा और उसके सहयोगियों के साथ-साथ वामपंथी दल और संप्रग को बाहर से समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर शिकंजा कस दिया है। भाजपा ने तो साफ कहा कि जो दोषी हैं, वे ही जांच रिपोर्ट मंगाकर उसमें बदलाव करा रहे हैं। सीबीआइ निदेशक ने अपने हलफनामे में वैसे तो कानून मंत्री से मुलाकात को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए उन्हें राहत देने की कोशिश भी की, लेकिन उनके दो शब्द अश्विनी कुमार और पीएमओ गले में अटक गए हैं।
सिन्हा ने लिखा है कि कानून मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय की इच्छा पर उन्हें रपट दिखाई गई। इसके बाद संसद में तमाम मसलों के साथ इस मुद्दे पर भी विपक्ष ने कड़ा रुख दिखाया। वरिष्ठ भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा कि सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में वादा किया था कि जांच की प्रगति रपट सरकार से साझा नहीं करेगी। लेकिन इसके बावजूद उसने ऐसा किया है। इस पर प्रधानमंत्री, कानून मंत्री और कोयला मंत्री को जवाब देना ही होगा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और पार्टी प्रवक्ताओं व अन्य नेताओं ने कहा कि अश्विनी कुमार ने प्रधानमंत्री को बचाने के लिए रिपोर्ट बदलवाई, यह अब स्पष्ट है, इसके बाद अब उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक हक नहीं है। भाकपा नेता गुरुदास दास गुप्ता और सपा के नरेश अग्रवाल समेत अन्य दलों ने भी सरकार पर सीबीआइ के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
इस मुद्दे पर चौतरफा घिरी सरकार ने झुकने के बजाय आक्रामक रुख अख्तियार किया है। सीबीआइ निदेशक के सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के बाद मनमोहन से अश्विनी कुमार की मुलाकात हुई। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ कोर कमेटी की बैठक भी हुई। पहले अश्विनी कुमार की सफाई आई कि सीबीआइ निदेशक ने कानूनी सलाह के लिए मुलाकात थी, जिसमें अटार्नी जनरल और सॉलिसीटर जनरल भी मौजूद थे। बहरहाल, अश्रि्वनी कुमार के इस्तीफे से कमलनाथ से लेकर मनीष तिवारी जैसे मंत्रियों ने इन्कार किया। आक्रामक रवैये के बीच आगे की रणनीति के लिए बैठकों का दौर जारी रहने की संभावना है।