
केकड़ी। ज्ञानी और अज्ञानी दोनों दिखने में एक समान होते है पर ज्ञाानी अपना समय ज्ञान से, खुशी से परमात्मा के स्मरण से गुजारता है पर अज्ञानी इसके विपरीत दुखी होकर दूसरे की निंदा चुगली करने में अपना समय गुजारता है तो दुखदाई होता है। यह उदगार बहन आशा ने अजमेर रोड़ स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए। निरंकारी मण्डल प्रवक्ता रामचन्द्र टहलानी ने बताया कि बहन आशा ने कहा कि कौआ किसका 1या ले जाता है कोयल किसकों 1या दे देती है बस अपनी मीठी आवाज से सबका मन मोह लेती है, वायु प्रदुषण तो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है पर मन का प्रदुषण शरीर के स्वास्थ्य के साथ-साथ घरों को तबाह कर देता है, सुख रिश्तों-नातों में नहीं, प्रभु-परमात्मा के स्मरण में है,आज सुख-प्यार बांटने में है, दिलों को दुख पहुंचाने में,दिलों के टुकड़े करने में नहीं। मन ही प्रभु परमात्मा का स्मरण कर सकता है, गुरू की महिमा गा सकता है, गुरू की महिमा गाने से कलह-कलेश दूर होते है। इंसान को अपने जीवन में भौतिक कामों के साथ-साथ सत्संग, सेवा, प्रभु सिमरण को अपनाना चाहिए जिससे यह लोक और परलोक दोनों सुधर जाते है। सत्संग के दौरान दादन देवी, रेखा, चेतन भगतानी, लक्ष्मण, संगीता, दीपा, पूनम, गेहीमल, तनुजा, गीता, लवीना ने गीत विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन अशोक रंगवानी ने किया।
-पीयूष राठी