कथा महलों की मोहताज नहीं : भाईश्री

DSC_1943-सुमित सारस्वत- ब्यावर। श्रीमद् भागवत कथा अश्वमेघ यज्ञ के समान है। भागवत का हर एक श्लोक मंत्र है। जिसका जाप करने से व्यक्ति का कल्याण हो जाता है। मंत्र का मनन करने मात्र से रक्षा हो जाती है। वेद कल्पवृक्ष है और भागवत फल है। यह उद्गार अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य रमेश भाई ओझा ने व्यक्त किए।
नारायण आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा आयोजन के चौथे दिन प्रवचन देते हुए कहा कि भाईश्री ने कहा कि भागवत सभी वेदों का सार है। भागवत श्रवण से मनुष्य के विचार शुभ होते हैं। सकारात्मक विचारों से ही जीवन सुखमय होता है। अच्छे विचारों से विश्व अच्छा बनेगा। भागवत कथा औषधि के समान है। जो सभी पापों का नाश करती है। जिस तरह अस्पताल में शस्त्र क्रिया से रोगी का इलाज होता है, उसी तरह कथा में शास्त्र क्रिया से इंसान के मस्तिष्क में सकारात्मकता आती है। भाईश्री ने कहा कि परमात्मा रस स्वरूप है। परमात्मा से मिलन का मार्ग कथा है। कथा अमृत के समान है। जिस तरह बिना घी का भोजन स्वाद नहीं देता, उसी तरह बिना कथा के बिता दिन व्यर्थ है। प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन कुछ वक्त भजन करना चाहिए। भजन अमृत का वह प्याला है, जिसे पीकर सारा जीवन मस्ती में जीया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुख का दूसरा नाम श्रीकृष्ण है। अगर सुख तो प्रतिदिन कृष्ण की भक्ति करें। भगवान आनंद सिंधु है। भगवान की भक्ति से सुख, शांति व आनंद की प्राप्ति होती है। भाईश्री ने संदेश दिया कि गुरु के प्रति सम्मान रखें। गुरु के हमारे ऊपर कई उपकार होते हैं। गुरु ही हमें सद्मार्ग का मार्ग दिखाते हैं। सद्गुरु संसार से विमुख कर परमात्मा में लीन करते हैं। हमें सद्मार्ग की राह दिखाते हैं। म्हने परदेशां क्यूं छोड्या सद्गुरु.., तेरी दुनिया में दिल लगता नहीं…, तेरी रहमतें बेमिसाल है.., रंग रंग पांडुरंग, रंग वि_ला.. भजन सुनाए।
DSC_1877संतश्री ने नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसफई व कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों की सराहना की। सोमवार को कथा प्रसंग के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंच संचालन रमेश बंसल ने किया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व माणकचंद जिंदल, श्यामसुंदर जिंदल, पूर्व विधायक माणक डाणी, देवीशंकर भूतड़ा, राधेश्याम डाणी, कृष्णकांत जिंदल, टीसी गोयल, सुमित सारस्वत, प्रेमकिशन गर्ग, ममता जिंदल, सुनील जैथल्या, सुमित्रा जैथल्या, संगीता गर्ग, मिलन बुद्धिया, संजय गर्ग, सुशील गर्ग, आशीष गोयल, सुखदेव मित्तल, सुरेश, सुमित अग्रवाल, रितेश, रतनलाल बंसल, विनोद अग्रवाल, कमल मुरारका, मनीष, किशनगोपाल पालीवाला, अपर्णा गर्ग, गोपाल गोयल, ज्ञानदेव झंवर, जितेंद्र शर्मा, नाथू सेन, द्वारका मंगल, मीना गोयल, आशा अग्रवाल, कौशल्या गोयल, गायत्री, संतोष बंसल, ललित बंसल, रमेश गोयल, सत्यनारायण अग्रवाल, निधि अग्रवाल, संतोष, अंतिमा गर्ग, गरिमा मंगल, जय ने भाईश्री का स्वागत कर आशीर्वाद लिया।

क्रिकेट से बेहतर है कथा
भाईश्री ने कहा कि कुछ लोग मनी, टाइम और एनर्जी वेस्टिंग की सोच रखते हुए कथा से दूर रहते हैं। जबकि घंटों तक क्रिकेट मैच का लुत्फ लेते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह खेल जरूरी है, उसी तरह भागवत कथा व सत्संग भी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन डे मैच के बजट से भी कम राशि में आठ दिन की कथा का आयोजन हो जाता है।

इनकम नहीं, आनंद बढ़ाओ
पूंजीपतियों के लिविंग स्टेटस पर कटाक्ष करते हुए भाईश्री ने कहा कि कुछ लोग शादियों में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं। जबकि धार्मिक आयोजन में राशि व्यय करने से कतराते हैं। हर इंसान अपनी इनकम बढ़ा रहा है। भूटान देश का उदाहरण बताते हुए भाईश्री ने कहा कि भूटान विश्व का ऐसा देश है जहां इनकम से आनंद से देश के विकास का आंकलन किया जाता है।

लिखते-लिखते लव हो जाए
भाईश्री ने टीवी पर प्रसारित होने वाले एक विज्ञापन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभु के प्रति ऐसा भाव होना चाहिए कि उनका नाम लिखते-लिखते ही लव हो जाए। अच्छा श्रोता ही अच्छा लेखक और अच्छा वक्ता बन सकता है। जहां प्यास और तृप्ति हो, उसी को प्रेम कहते हैं। गंगा और यमुना कृष्ण प्रेम का ही दूसरा रूप है।

आकर्षण और प्रेम में अंतर
भाईश्री ने कहा कि आकर्षण और प्रेम में अंतर है। वर्तमान वक्त में प्रेम पवित्र नहीं रहा है। अगर प्रेम विवाह करने के बाद ही किसी युगल का तलाक हो जाए तो वह सच्चा प्रेम नहीं था। लड़की आकर्षण के वशीभूत होकर अपने माता-पिता को छोड़ जाती है और दुखी होती है। यह चिंता का विषय है।

बालिका ने सुनाए शास्त्र मंत्र
कथा के मध्य रावतभाटा से आई 9 वर्षीय बालिका हरिश्री पुत्री हितेंद्र चतुर्वेदी ने मंच पर शास्त्रों के श्लोक सुनाए। भाईश्री की आज्ञा पर छठी कक्षा की इस छात्रा ने भीष्म स्तुति गाई। इस बालिका को रामायण स्तुतियां, हनुमान चालीसा सहित कई शास्त्र कंठस्थ हैं। भाईश्री ने कहा हर वैष्णव को हनुमान चालीसा कंठस्थ होनी चाहिए। बालिका की स्तुति सुनकर श्रोताओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सराहना की।
कथा पांडाल तालियों से गूंज उठा।

कथास्थल पर कार्यालय प्रबंधन सर्वश्रेष्ठ
ब्यावर शहर में पहली बार विशाल स्तर पर आयोजित इस कथा के सफल संचालन के लिए कथास्थल पर कार्यालय का संचालन किया जा रहा है। इस कार्यालय का संचालन इतना बेहतर है कि यहां आने वाले भक्तों की हर समस्या का समाधान तत्काल हो रहा है। कथा के दौरान दो महिलाओं के मोबाइल खो गए थे। कार्यालय प्रभारी मिलन बुद्धिया व सुशील गर्ग ने तत्परता दिखाते हुए मोबाइल ट्रेस करवाए और उस क्षेत्र में जाकर मोबाइल लाए। कथास्थल पर खोया मोबाइल चंद घंटों में वापस पाकर मोबाइल धारक ने अतिप्रसन्नता व्यक्त की। वहीं कथा श्रवण करते हुए एक बुजुर्ग को सीने में दर्द की तकलीफ हुई। इस पर कार्यालय में कार्यरत संजय गर्ग व आशीष गोयल ने पीडि़त की मदद करते हुए मौके पर प्राथमिक चिकित्सा मुहैया करवाई। पीएमओ डॉ.प्रमोद पोरवाल ने मरीज की जांच की और तत्काल चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। इस कथा का संचालन 20 वॉकी-टॉकी से किया जा रहा है। साथ ही हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए कथास्थल पर कई सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं।

विशेष प्रसाद का वितरण
रविवार को अवकाश के कारण दस हजार से अधिक श्रोताओं ने कथा श्रवण का लाभ लिया। कथा विश्राम होने पर विशेष फुलेरा प्रसाद का वितरण किया गया। यह प्रसाद पाली के रंगजी मंदिर से आए सेवकों ने पाली से आए गोपाल गोयल व रमेश छीपिया के निर्देशन में बनाया।

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