श्रृद्वा एवं विश्वास के महत्व पर प्रकाश डाला

10269364_10204109680117113_6007974588508623116_nविश्व हिंदू परिषद अजयमेरू महानगर द्वारा विश्व हिंदू परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के अंतरगर्त चल रही संगीतमय राम कथा के तीसरे दिन कथा वाचक राष्ट्रीय संत परम पूज्ज दिव्य मुरारी बापू ने आज अपने श्रीमुख से सती मोह एवं र्पावती जन्म  का वर्णन करते हुए  श्रृद्वा एवं विष्वास के महत्व पर प्रकाश डाला।
जहॅा प्रीति पर्दा नही, जह पर्दा नही प्रीति। जहॅा प्रीति पर्दा हुई, यह दुश्मन की रीति ।।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए महानगर मंत्री शशिप्रकाश इन्दोरिया ने बताया की पूजा अर्चना के पश्चात संत श्री के श्रीमुख से कथा प्रारम्भ हुई। सर्वप्रथम भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया। भगवान शंकर विश्वास के स्वरूप है, माता पार्वती श्रृद्वा स्वरूप है। जब तक जीवन में श्रृद्वा विश्वास नहीं होगा तब तक ह्द्य में विराजमान परमात्मा का अनुभव बडे -बडे योगियो को भी नहीं हो सकता। भगवान प्राणी मात्र के ह्द्य में निवास करते है। लेकिन फिर भी हमलोग दुःखी है। इसका कारण है हमें अनुभुती नहीे हो रही है। पुजा पाठ ध्यान ज्ञान सब उसी परमात्र्थ तत्व की अनुभुति के लिए हैं ।
10260001_10204109681757154_453826448212233925_nतत्पश्चात बापू द्वारा सती मोह के महत्व पर प्रकाश डाला कि व्यक्ति के जीवन में अज्ञान होने की सम्भावना रहती है। इसीलिए सन्तों ने अपनी वाणी मे कहा है “यह जग कुबुद्वी का खेत , जब तक जीवे तब तक चेत “ भगवान श्रृद्वा में बसते है। अगर आप मे श्रृद्वा है तो आपके लिए हर जगह परमात्मा है। शास्त्र और सब वचन कहते है मनुष्य अस्थी व मंास से नही बना है, जिस व्यक्ति मे माता पिता गुरू गोविन्द ध्ार्म ओर देश के प्रति श्रृद्वा नही है। उसे मनुष्य कहना गलत है ।
तत्पश्चात संत श्री ने र्पावती जन्म पर प्रकाश डाला कि पार्वती माता श्रृद्वा स्वरूप है हमारे जीवन में श्रृद्वा जन्म लेती है, घटती और बढती है, और कभी समाप्त ही हो जाती है, तभी भगवती सती के रूप मे शरीर का त्याग करती है और कभी पार्वती के रूप में जन्म लेती है, कभी बडी होती है, लेकिन शिवजी सदैव एक जैसे रहते है । अर्थात विश्वास सदा एक जैसा है। श्रृद्वा ध्ाटती बढती रहती है । आवश्यकता है कि हम अपने जीवन में श्रृद्वा को बढावे।
आज सर्वप्रथम रामायण एवं संत श्री की पूजा आज के जजमान श्री सुनिल अग्रवाल एंव श्री मोहन खंडेलवाल के द्वारा की गई। प्रशाद वितरण श्री शरद गोयल एवं श्री सूरज जी गोयल के द्वारा किया गया।
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री आनंद अरोड़ा सर्वेश्वर अग्रवाल श्री सरदारमल जैन श्री अशोक मेघवाल श्री लेखराज सिंह श्रीमती अल्का गौड़ अभिलाषा शक्ति जैन अनुपम गोयल राजेश जैन सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कल 15 दिसंबर को कथा का समय प्रात 10 बजे से 12.30 बजे तक रहेंगा। आगे कथा नियत समय अनुसार ही चलेंगी जिसमे प्रतिदिन रामायण के अलग अलग सोपानों पर संगीतमय कथा का वाचन होगा। 21 तारीख को दोपहर 1.15 बजे विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन रखा गया है। जिसमे देश भर के अनैक संत महात्मा उपस्थित रहेंगे।
प्रचार प्रमुख 
शरद गोयल  9414002132

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