(राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण का मामला)
जयपुर, राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण, जयपुर ने सेवा समाप्तिआदेश अपास्त करते हुए अपीलार्थी को समस्त परिलाभों सहित सेवा में बहाल किए जाने के आदेश प्रत्यर्थी संस्था प्रबन्ध समिति श्री महावीर दिग बर जैन बालिका सीनियर सैकण्डरी स्कूल 1, खिन्दूको की धर्मशाला, चौरूकों का रास्ता, चौडा रास्ता, जयपुर को दिया उल्लेखनीय है कि अपीलार्थीया श्रीमती प्रतिभा अग्रवाल की नियुक्ति साक्षात्कार के आधार पर पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन) के पद पर आदेश दिनांक 1-7-1989 के द्वारा नियुक्ति दी गई। जिसके बाद आदेश दिनांक 30-6-1992 से उसे सहायक अध्यापक के पद रिक्त होने की सूचना देकर साक्षात्कार हेतु उपस्थित रहने के लिए कहा गया अपीलार्थीया को सहायक अध्यापक के अस्थायी पद के विरूद्ध दिनांक 7-7-1992 को आदेश दिनांक 6-7-1992 की अनुपालना में नियुक्त हुई । संस्था को दी गई 25 वर्षीय सेवाओं के दौरान अपीलार्थीया को कभी भी अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु कोई नोटिस नहीं दिया गया । अपीलार्थीया की ओर से अधिकरण के समक्ष पूर्व में प्रस्तुत आवेदन सं या 188/2000 में आदेश दिनांक 22-4-2002 के द्वारा अपीलार्थीया के पक्ष में निर्णित हुआ। प्रत्यर्थी संस्था ने मनमाने तौर पर आरोप पत्र दिनांक 12-6-2013 अपीलार्थीया को दे दिया एवम सेवा समाप्ति आदेश दिनांक 9-5-2014 के जरिये अपीलार्थीया की सेवायें समाप्त कर दी। सेवा समाप्ति आदेश को अपीलार्थीया ने अपने अधिवक्ता डी पी शर्मा के माध्यम से अधिकरण के समक्ष चुनौती दी अपीलार्थीया के अधिवक्ता का तर्क था कि प्रत्यर्थीगण की ओर से सेवामुक्ति आदेश पारित करने से पूर्व प्रक्रिया की पालना नहीं की गई है एवम मनमाने तौर पर पारित आदेश पोषणीय नहीं हो सकता । अपीलार्थीया के अधिवक्ता का यह भी तर्क था कि अपीलार्थीया की नियुक्ति के समय प्रत्यर्थी संस्था अनुदानित थी एवम राज्य सरकार ने सभी शैक्षिक संस्थाओं का अनुदान सन् 2012 से बन्द कर दिया जिसके कारण प्रत्यर्थीगण अपनी सुविधा के अनुसार अपीलार्थीया की सेवा शर्तो को इस प्रकार परिवर्तित नहीं कर सकते जो अपीलार्थीया के लिए नुकसानदायक हो । अपीलार्थीया को राजस्थान गेर सरकारी शैक्षिक संस्था नियम 1993 के नियम 39 (2) में वर्णित प्रक्रिया का अनुसरण किये बिना मनमाने तौर पर पारित आदेश दिनांक 9-5-2014 के अनुसरण में सेवामुक्त किया गया है जो किसी भी प्रकार न्योयोचित एवम विधि स मत नहीं हो सकता । मामले की सुनवाई के पश्चात अधिकरण ने आदेश दिनांक 9-5-2014 को अपास्त करते हुए प्रत्यर्थीगण को अपीलार्थीया को समस्त परिलाभों सहित सेवा में बहाल करने एवम् सेवामुक्ति से बहाली होने तक के वेतन की राशि पर अपीलार्थीया को स पूर्ण राशि पर बकाया होने की दिनांक से भुगतान किये जाने की दिनांक तक वर्तमान में प्रावधायी निधि विभाग द्वारा राजकीय कर्मचारियों को देय ब्याज की दर से देय ब्याज सहित राशि प्रत्यर्थीगण को अदा करने का आदेश दिया ।
डी पी शर्मा
एडवोकेट
मो. नं. 9414284018