उपभोक्ता बने जागरूक – शिव शंकर हेड़ा

shiv shankar hedaअजमेर, 23 दिसम्बर। संभागीय उपभोक्ता जाग्रति सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए शुक्रवार को सूचना केन्द्र सभागार में अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शिव शंकर हेड़ा ने कहा कि उपभोक्ताओं को और ज्यादा जागरूक होने की आवश्यकता है। पैकिंग मे बिकने वाली वस्तुओं पर उसको बनाने में लगने वाली लागत की सूचना अंकित की जानी चाहिए। उपभोक्ताओं का शोषण रोकने में उपभोक्ता आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उपभोक्ताओं को आगे आकर अपने हितो की रक्षा करनी पड़ेगी। सम्मेलन में अजमेर नगर निगम के महापौर धमेन्द्र गहलोत ने भी शिरकत की।
उपभोक्ता दिवस के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री किशोर कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा उपभोक्ता संरक्षण के संबंध में विशेष प्रयास किए जाते है। किसी उत्पाद में कमी महसूस होने पर जिला प्रशासन द्वारा उसके नमूने विभिन्न स्थानों से संकलित किए जाते है। नमूनों का तय मानको पर खरा नहीं उतरने पर संबंधित के विरूद्ध जुर्माना एवं अन्य कानूनी कार्यवाही अमल में लायी जाती है। उपभोक्ताओं के सावधान होने के साथ-साथ अब विक्रेता भी सचेत होने लगे है। इससे उपभोक्ताओं को कम से कम नुकसान हो रहा है।
केन्द्र स्तर पर गठित उपभोक्ता संरक्षण परिषद के सदस्य डाॅ. अनंत शर्मा ने अपने संबोधन में भी 30 वर्षों में उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्रा में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। संगठनों एवं उनके पदाधिकारियों के कार्य को पहचान और सम्मान केन्द्र सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में उपभोक्ता में जितनी जागरूकता और समझदारी बढ़ी है उसी अनुपात में उपभोक्ता को सावधान होना भी आवश्यक है। तकनीकी क्षेत्रा में वृद्धि के कारण उपभोक्ता हितो पर हर तरह से प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम द्वारा उपभोक्ता को 6 प्रकार के अधिकार दिए गए है। सुरक्षा के अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ता को सुरक्षित वस्तु मिलना सुनिश्चित किया गया है। इसी प्रकार उत्पाद तथा उसमे उपयोग की जाने वाली सामग्री के बारे में जानने का अधिकार उपभोक्ता को है। बाजार में मिलने वाले टमाटर का चित्रा लगे सोस कद्दू जैसी सब्जियों से वेजिटेबल सोस के नाम से बेचे जाते है। बोतल बंद पानी मिनरल वाॅटर नहीं होकर पैकेज्ड ड्रिकिंग वाॅटर है। इसी प्रकार पाॅम आॅयल को घी के जैसी पैकिंग करके बेचा जाता है। उस पर घी कहीं नहीं लिखकर कोने में छोटे अक्षर में पाॅम आॅयल लिखा जाता है। इस तरह की बातो से उपभोक्ता जागरूक होकर ही बच सकता है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता को वस्तु एवं सेवा चयन का अधिकार है। स्कूलों द्वारा अभिाभावको को पुस्तके, गणवेश एवं अन्य सामग्री निर्धारित स्थान से खरीदने के लिए बाध्य करना गैर कानूनी है। विक्रेता के द्वारा बेचा गया माल पसन्द नहीं आने पर लौटाना उपभोक्ता का अधिकार है। यह अधिनियम उपभोक्ता को वस्तु अथवा सेवा में कमी होने पर क्षतिपूर्ति उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करता है। उपभोक्ता को हुए सम्पूर्ण नुकसान की भरपाई संबंधित द्वारा की जाएगी। भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से गुमराह करने पर भी क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। उपभोक्ता को जागरूक करने का दायित्व भी अधिनियम के माध्यम से निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोनिक कांटो से छेड़छाड़, पैट्रोल पम्पों को रिमोट से संचालित करने, होटल में सब्जी को प्लेट से भेजने, कैक को पाउंड से बेचने तथा रियल स्टेट के विज्ञापनों में दूरी मिनट से बताना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत गैर कानूनी है। उपभोक्ताओं के हितो की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा जिला उपभोक्ता मंच, उपभोक्ता संरक्षण परिषद तथा स्टेट कंज्यूमर हैल्पलाइन नम्बर 18001806030 तथा आॅनलाइन शिकायत दर्ज करवाने की व्यवस्था की गई है।
जिला उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष श्री विनय कुमार गोस्वामी ने कहा कि उपभोक्ता को इस बात की शंका नही रहनी चाहिए की उसे अदा की गई कीमत के बराबर प्रतिफल मिल रहा या नही। ग्रामीण उपभोक्ता संघ मसूदा के अध्यक्ष जसवंत सिंह रावत ने कहा कि सरकार ने उपभोक्ता आंदोलन को गति प्रदान करने के लिए विद्यालयों में उपभोक्ता क्लब का गठन किया गया है। इससे नयी पीढी़ अपने अधिकारों के प्रति सजग होगी।

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