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आरोपो को सिरे से खारिज किया मण्डावर सरपंच प्यारी रावत ने - Ajmernama

आरोपो को सिरे से खारिज किया मण्डावर सरपंच प्यारी रावत ने

वुमेन्स पावर स्पेशल
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष

पंचायत समिति साधारण सभा व जिला परिषद में बेबाक रखती है जन समस्याएं
घूंघट की ओट से निकली बेबाक सरपंच, अब कोरम, ग्रामसभा व निर्णय खुद लेती है
समस्यायों को लेकर अधिकारियों, कार्मिकों व ग्रामीणों से खुद करती है संवाद

IMG_20170304_150704अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के उत्थान, भेदभाव को लेकर नाना प्रकार का कार्यक्रम आयोजित होते है। दुनिया में कुल आबादी की आधी आबादी महिलाओं की है और राजस्थान के पंचायती राज के अंतर्गत आधी आबादी यानि महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण है। महिलाओं को पंचायती राज चुनाव में आरक्षण को लेकर महिला जनप्रतिनिधि की सक्रियता, पति, ससुर या घर परिवार वालों के द्वारा सत्ता का उपयोग जैसे सवाल उठते रहे है पर राजसमंद जिले के भीम पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम पंचायत मण्डावर में घूंघट की ओट व चुल्हे चोके से पंचायती राज चुनाव 2015 में स्वयं काम करने, कोरम , ग्रामसभा व स्वयं महत्वपूर्ण निर्णय लेने जैसे चुनावी मुद्दों से प्यारी रावत को अपार जन समर्थन से चुनाव जीता।
सरपंच प्यारी रावत की सबसे बड़ी चुन्नोति थी ,चुनावी वादों को सच कर दिखाना। घर व खेती बाड़ी का कामकाज करने वाली चुल्हे चोके से निकल कर पंचायत की सरपंच बनने वाली प्यारी रावत ने सबसे पहले जनकल्याणकारी योजनायों की विस्तृत जानकारी ली, योजनायों को समझा, क्रियान्वय करने की ठानी। पहली कोरम हुई तो डरी सहमी सी थी एक एक कर सभी कार्यो को बारीकी से समझा, पंचायत समिति स्तर पर अकेले जाना, साधारण सभा की बैठकों में ग्राम की जन समस्यायों को पहली बार रखा तो कुछ झिझक दूर हुई। इसके बाद जिला स्तर पर आयोजित सरपंच कार्यशाला मील का पत्थर साबित हुई। चुनाव में पराजित पक्ष ने पहले दिन से निराधार आरोप पर आरोप लगाते गये और प्यारी जानकारी बढ़ाते हुए योजना किर्यान्विति से मजबूत होती गई।
सरपंच प्यारी रावत सुबह जल्दी उठती है ,घर का सारा काम काज करती , बच्चों को स्कुल भेजती है, अलसुबह घर पर ही आने वाले ग्रामवासियों की समस्यायों व कामकाज निपटाने के साथ खुद के हाथ से बनाई चाय की प्याली जरूर पिलाती है। खेती बाड़ी का भी कामकाज निपटाने के बाद ग्राम हर रोज ग्राम पंचायत कार्यालय जाती। महिला हो या पुरुष सभी में लोकप्रिय हो गईं। सप्ताह में एक आध बार अलग अलग गाँवो मजरों में घर घर जाकर भी संपर्क करती है। सामाजिक समारोह हो या कोई भी अन्य कार्यक्रम सभी में बढ़चढ़कर भाग लेती है। दुःखद वेला , बीमारी, दुर्घटना में स्वयं मौके पर पहुचती है ।
गांव की किसी भी समस्या पर सीधे अधिकारियों, कार्मिको से बात करती है। गांव के अधिकतर लोगों के फोन नम्बर अपने मोबाइल में सुरक्षित्वकर रखे है। गांव से सम्बंधित किसी भी समस्या पर सीधे गांव के लोगों से सीधा संवाद भी करती है। व्हाट्सअप , फेसबुक सोशल मीडिया पर भी निरन्तर सक्रिय रहते हुए ग्रामवासियों की समस्यायों व सवालों का जवाब भी देती है।
प्यारी रावत बताती है शुरुआत में स्वयं काम करने के लिये कार्मिकों, अधिकारियों, अनुभवी लोगों, परिवार जनों का सहयोग लिया पर अब कोई दिक्कत नही है। कोई भी बड़ा निर्णय लेने में अनुभवी सलाहकार लोगों से सलाह भी ले लेती है।

भ्रष्टाचार की हुई शिकार, सबक सिखाने आई राजनीती में

सरपंच प्यारी रावत ने 2011 में ग्राम पंचायत में लोक शिक्षा केंद्र में प्रेरक पद फॉर्म भरा था और उस वक्त अंतिम तिथि तक एकमात्र आवेदन आने के बाद भी तत्कालीन सरपंच ने भ्रष्टाचार करते हुए अन्य का चयन कर दिया। उसी दिन से तत्कालीन सरपंच व उसका सहयोग करने वालों को सबक सिखाने हेतु ठानी । 2015 चुनाव में सामने चुनाव लड़कर जीता।

स्कूली जीवन में मंच पर नही गई, अब बेबाक रखती है समस्याएं

सरपंच प्यारी रावत ने स्कूली शिक्षा पीहर के गांव सादडाई समेलिया के समीप के गांव अजीतगढ़ से ली पर स्कूली जीवन में कभी भी राष्ट्रिय पर्वों, अन्य कार्यक्रमों में कभी मंच पर नही गई पर सरपंच बनने के बाद झिझक को मिटाया और सार्वजनिक मंचों पर बेबाक रूप से बात रख रही है। अब किसी मीटिंग में खोमोश रहती है तो भी सभी की निगाहें प्यारी रावत पर रहती है।

विकास की लिखी इबारत, हाईटेक किया मण्डावर को

प्यारी रावत जब सरपंच बनी तब मण्डावर की कोई विशिष्ट पहचान नही थी, मण्डावर पिछड़ी पंचायतों में गिना जाता था। प्यारी रावत ने विकास की संभावनाएं तलाशते हुये कार्ययोजना बनाई, कार्यों की वरीयता तय की। 24 मजरों में फैले मण्डावर के दुर्गम प्रत्येक मजरे में पहली बार पक्के रास्ता का सपना सच कर दिखाया। एक एक कर हर वादे को पूरा किया। डिजिटल क्रांति में डिजिटल मण्डावर, स्वच्छ भारत मिशन में क्लीन ग्रीन मण्डावर की सोच को विकसित कर हाईटेक किया। पुरे क्षेत्र में चौपाल, चाय की थडी हो या सोशल मीडिया सब जगह मण्डावर गांव की चर्चा होती रहती है।

खुद के वेतन से लगाया स्कुल में टीचर
शिक्षक कमी का दर्द सहा नही गया और प्यारी रावत ने जीतने के बाद कार्य ग्रहण के दिन अपने वेतन पर सीनियर स्कुल में गणित विषय का टीचर लगाया । शिक्षक कमी को पूरा करने हेतु लम्बा संघर्ष किया।

सरपंच संघ उपाध्यक्ष व रावत समाज की प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री बनी
अपनी काबिलियत व योग्यता का लोहा मनवाने के बाद भीम पंचायत समिति में सरपंच संघ उपाध्यक्ष बनी । इसी तरह रावत समाज में मण्डावर को विशिष्ठ पहचान दिलाने वाली प्यारी रावत को रावत राजपूत महासभा में प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री का महत्वपूर्ण पद मिला। सामाजिक मुद्दों पर अच्छी पकड़ बना ली है।

इनका कहना
मण्डावर गांव को विशिष्ठ पहचान दिलाना, गांव को शिक्षित, विकसित, डिजिटल, क्लीन व ग्रीन बनाने के साथ मातृशक्ति को अग्रिम पंक्ति में लाने का ध्येय पूरा करना मेरा सपना है।

प्यारी रावत
सरपंच – ग्रा. पं. मण्डावर
उपाध्यक्ष- सरपंच संघ भीम

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