आजाद पार्क में नानी बाई रो मायरो आरंभ

अजमेर। भक्त की कथा सुनने स्वयं भगवान आते हैं। सत्संग भावना से जुड़ा होता है। सत्संग के बिना विवेक नहीं होता है। प्रभु की कृपा से ही संत्सग मिलता है। यह प्रवचन राधे राधे परिवार की ओर से पथमेड़ा गोधाम महातीर्थ की सहायतार्थ आजाद पार्क में आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो कथा के शुभारंभ अवसर पर जोधपुर निवासी कथा मर्मज्ञ श्री राधा कृष्ण महाराज ने दिए।
उन्होंने कहा कि जहां गो सेवा होती है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। भारत में गो पालन की बड़ी प्राचीन परंपरा है। उन्होंने बताया के पूर्व में गो पालन की संख्या के आधार पर ही किसी भी परिवार की संपन्नता का आकलन किया जाता है। साथ ही संस्कारवान होने का आधार भी यही था। उन्होंने कहा कि भगवान गोपी के बिना प्राप्त नहीं होते और वर्तमान समय में गाय ही गोपी का स्वरूप है। उसकी अनन्य भाव से सेवा करने से यह भव पार हो जाता है। सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गाय, गंगा, गीता व गोवर्धन से ही सनातन धर्म स्थिर है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महान भगवत् भक्त नरसी मेहता का चरित्र गो सेवा के लिए है। नागर ब्राह्मण परिवार, जूनागढ़ में जन्मे नरसी मेहता के यहां गो सेवा की प्रमुखता रही। उनके परिवार में माता-पिता, दादी, बड़ा भाई और भाभी सहित स्वयं मूक बधिर थे। उनका प्रारंभिक जीवन अत्यधिक कष्टमय रहा और घर में अशांति सी रहती थी। बाल्यकाल में उनके माता-पिता का देहांत होने के कारण दादी ने उनका लालन पालन किया और उनके संस्कारों की वजह से ही उनमें भगवत् भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। दादी ने भगवान शिव की पूरे भक्ति भाव से आराधना की। इसी के परिणाम स्वरूप शिव मंदिर में स्वयं भगवान शिव ने एक महात्मा के रूप में आ कर नरसी मेहता को वाणी प्रदान की। बाद में भाभी की प्रताडऩा से व्यथित हो कर उन्होंने घर परिवार छोड़ दिया और शिव भक्ति में लीन हो गए। भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वर मांगने को कहा। इस पर उन्होंने भौतिक ऐश्वर्य की बजाय राधा कृष्ण के दर्शन की अभिलाषा प्रकट की। शिव जी ने कहा कि गोपी बने बिना कृष्ण का दर्शन नहीं हो सकता। गोपी बनने के लिए स्त्री होना जरूरी नहीं है। वस्तुत: यह एक भाव है। जिसमें उत्कंठा, व्याकुलता और लालसा आवश्यक है, तभी गोलोक धाम में जा कर गोपाल की प्राप्ति होती है। इस पर उन्होंने अनन्य भाव से श्रीकृष्ण की भक्ति की। उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर भगवान शिव उन्हें गो लोकधाम ले गए।  वहां श्री कृष्ण ने उन्हें दर्शन दिए, मगर साथ ही कहा कि अभी आपके प्रारब्ध संसार के कर्मों का भोग करना बाकी है और ऐसा कहते हुए उनको जूना गढ़ व द्वारका के बीच धन धान्य की पूरी व्यवस्था की। नरसी मेहता ने अपनी पुत्री नानी बाई का विवाह पूरे ठाठ से अंजार नगर के सेठ श्रीरंग के पुत्र से किया। साथी साधु संतों को अपना सब कुछ दे दिया। और वे विपन्न हो गए। बाद में पुत्री नानी बाई की पुत्री की शादी के मौके पर मायरा भरने का न्यौता मिला, जिसमें कुंकुम पत्री के साथ अपार संपत्ति की मांग की गई, जो पूरा करना उनके लिए संभव नहीं था। वह कुंकुम पत्री उन्होंने द्वारका के रास्ते में एक पीपल के पेड़ पर बांध दी और अपने ठाकुर जी से प्रार्थना की कि अब आप ही यह कार्य संपन्न करवाइये। रविवार को कथा का समापन यहीं पर हुआ। आगे की कथा सोमवार को सुनाएंगे।
राधे राधे परिवार के पवन मिश्रा व विष्णु मिश्रा ने बताया कि सोमवार को पथमेड़ा गोधाम के गो ऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानंद जी महाराज के सान्निध्य में कथा होगी। कथा के शुभारंभ के मौके पर अपार जनसमूह की मौजूदगी में नगर निगम मेयर श्री कमल बाकोलिया, विधायक श्रीमती अनिता भदेल, पूर्व नगर परिषद सभापति सुरेन्द्र सिंह शेखावत ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। आंरभ में संन्यास आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी शिवज्योतिषानंद जी महाराज ने परम श्रद्धेय श्री राधा कृष्ण महाराज का स्वागत किया।

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