प्रधानमंत्राी नरेन्द्र मोदी की सरकार कानून मंत्रालय द्वारा लाये जा रहे ‘‘जस्टिस क्लॉक सोफ्टवेयर’’ के विरोध में अजमेर शहर कांग्रेस के महासचिव व कांग्रेस विधि मानवाधिकार व आर.टी.आई.विभाग के जिलाध्यक्ष वैभव जैन एडवोकेट के नेतृत्व में वकीलों के एक शिष्ट मण्डल ने राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्राी के नाम जिला कलक्टर अजमेर को ज्ञापन दिया।
वैभव जैन ने बताया कि केन्द्रीय सरकार द्वारा न्यायपालिका को दबाव में लेने एवं अपने आधिपत्य व अधिकार में लेने के उद्देश्य से सरकार बनने के बाद से ही निरन्तर प्रयास किये जा रहे है उसी क्रम में प्रधानमंत्राी श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा व कानून मंत्राी श्रीमान् अरूण जेटली द्वारा न्यायपालिका के कॉलेजियम सिस्टम को हटाकर छण्श्रण्।ण्ब्ण् ;नेशनल ज्यूडिशियल अपोईन्टमेन्ट कमीशनद्ध लाया जा रहा था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अवैधानिक करार देते हुए शून्य व निरस्त कर दिया था। उसके पश्चात् प्रधानमंत्राी द्वारा ज्यूडिशयल पर अपना बस नहीं चलने पर पुनः उक्त जस्टिस क्लॉक सोफ्टवेयर के माध्यम से न्याय पालिका को अपने अधीन करने के उद्देश्य से एवं अपने दबाव में लेने के उद्देश्य से च्मदकमदबल व िब्ंेमे की आड़ में उक्त सॉफ्टवेयर लाने की तैयारी की जा रही है। जिसमें प्रधानमंत्राी व केन्द्रीय सरकार द्वारा समस्त राज्य सरकारों को भारत के सभी अदालतों में लम्बित केसों व मुकदमों का पूरा डाटा तारीख पेशी, जजों के नाम, कार्यवाहियां इत्यादि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये है तथा सॉफ्टवेयर बनने के बाद केन्द्र सरकार व राज्य सरकारें किसी भी न्यायिक अधिकारी को दबाव में लेने के उद्देश्य से उसको पत्रा जारी कर सकती है। उससे जवाब मांग सकती है। उसकी रेंकिंग तय करने के बहाने जज व अदालत पर कार्यवाही कर सकती है। जज को दबाव में ले सकती है। ऐसे में स्वतंत्रा न्याय का हनन होगा तथा उसका दुरूपयोग निश्चित रूप से बढेगा। इसी के साथ न्याय पालिका के केसों का सम्पूर्ण डाटा तथा किसी भी मुकदमें में वर्णित तथ्यों व कार्यवाहियों व मुकदमें के पक्षकारों की गोपनीयता भंग व बाधित होगी। जबकि वर्तमान में न्याय व ज्यूडिशरी से संबंधित समस्त अधिकार न्याय पालिका, हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के पास है।
न्यायपालिका अपना कार्य बखुबी कर रही है तथा वर्तमान में न्याय पालिका पर दबाव नहीं है। न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका भारत के एक स्वतंत्रा स्तम्भ है। तथा चौथा स्तम्भ मीडिया है।
जैन ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्राी द्वारा जान बूझकर कार्यपालिका, विधायिका के साथ-साथ न्यायपालिका के कार्यो व अधिकार क्षेत्रा में भी दखल दिया जा रहा है जो भविष्य के परिणामों व भारत की गरिमा व न्याय की स्वतंत्राता के लिए घातक है। प्रधानमंत्राी विधायिकों, सांसदों, ब्यूरोक्रेट्स की योजनाएं उनकी क्रियान्विति हुई या नहीं हुई। कार्य पूरे हुए या नहीं हुए, इसको लेकर कोई ‘‘क्लॉक सोफ्टवेयर’’ नहीं ला रही। इसकी बजाय न्यायपालिका को वश में करने के उद्देश्य से उक्त जस्टिस क्लॉक सोफ्टवेयर ला रही है। ऐसे में शिष्ट मण्डल ने ज्ञापन के माध्यम से जस्टिस क्लॉक सोफ्टवेयर के वर्तमान पैटर्न का पुरजोर विरोध किया है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि अगर अदालतों में अटकें लाखों मुकदमों की ।बबवनदजंइपसपजल व च्मदकमदबल के बारे में अगर केन्द्रीय सरकार सही में कोई उचित फैसला लेना चाहती है तो जस्टिस क्लॉक सोफ्टवेयर का पूरा नियंत्राण व अधिकार राज्यों के हाई कोर्ट, व सुप्रीम कोर्ट के अधीन करें व हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट को ही उक्त संबंध में जवाब तलब व कार्यवाही करने दें। उनके कार्य में जस्टिस क्लॉक सोफ्टवेयर के माध्यम से दखल ना दें।
ज्ञापन देने वालों में वैभव जैन सहित अजय त्रिपाठी, विवेक पाराशर, चन्द्रभान सिंह राठौड, जितेन्द्र खेतावत, ललित कुम्पावत, गुलजीत सिंह, अभय वर्मा, शंकर ढिल्लीवाल, तौसिफ खान, प्रेमराज, मनोज कोटिया, अनिल गौड, आनन्द सिंह राणा, जितेन्द्र शर्मा, राजेश यादव, आदि उपस्थित थे।
(वैभव जैन)
एडवोेकट
महासचिव-शहर कांग्रेस अजमेर
जिलाध्यक्ष-विधि मानवाधिकार विभाग