डॉ पंचोली को ‘वेदविद्या पुरूषोत्तम‘ उपाधि से नवाजा
अजमेर/अखिल भारतीय साहित्य परिषद् और लोकभाषा प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार 28 जुलाई 2018 को चारण संस्थान में विद्वजन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुरी उड़िसा से लोकभाषा प्रचार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सदानन्द दीक्षित ने वेद प्रसार एवं संस्कृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ बद्रीप्रसाद पंचोली को ‘वेदविद्या पुरूषोत्तम‘ की उपाधि से सम्मानित किया। कार्यक्रम में विविध भाषाओं के वरिष्ठ साहित्यकारों का अभिनन्दन भी किया गया। संस्कृत भाषा के लिए डॉ पूर्णचन्द्र उपाध्याय, तमिल भाषा के लिए डॉ लक्ष्मी अय्यर, कश्मीरी भाषा के लिए डॉ चमनलाल रैना, राजस्थानी के लिए विनोद सोमानी हंस और पंजाबी के लिए बख्शीश सिंह को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
समारोह में अध्यक्षता कर रहे डॉ दीक्षित ने डॉ पंचोली को गुरूओं का गुरू बताते हुए कहा कि आज हम मनुष्य धर्म को भूल रहे हैं, समाज धर्मान्धों के प्रभाव में संकट में खड़ा है, ऐसे समय में सद्गुरू ही सही राह दिखा सकते हैं। लोकभाषा संस्कृत के प्रसार और साहित्य सर्जना के लिए कार्य कर रहे विद्वजन ऋषितुल्य हैं। मूल्यबोध कराने वाले श्रेष्ठ गुरूजन की स्तुति करके हम जीवन को श्रेष्ठ बना सकते हैं। सारस्वत अतिथि महंत श्री श्यामसुन्दर जी देवाचार्य ने कि भारत की संस्कृति और सभ्यता को समझने के लिए संस्कृत को समझना जरूरी है। भाषा और साहित्य ही किसी देश का भविष्य तय करते हैं। विशिष्ट विद्वान डॉ बद्रीप्रसाद पंचोली ने कहा कि महाभारत जैसे ग्रंथों सहित देशभर में अनेक ऐसे प्रसंग हैं जो हमारी संस्कृति से जुडे़ हुए हैं, रचनाकारों को अपनी लेखनी से उन्हें उकेरने की आवश्यकता है। सर्वधर्म सहिष्णुता भारत की मूल अवधारणा है इस विचार को आगे बढ़ाना चाहिए। प्रारंभ में डॉ निरंजन साहू ने अतिथि परिचय कराया तथा साहित्यकार उमेश कुमार चौरसिया ने स्वागत भाषण दिया। गोविन्द भारद्वाज, कुलदीप सिंह रत्नू, डॉ अनीता खुराना एवं डॉ दुष्यन्त पारीक ने उपरणा ओढ़ाकर सभी का स्वागत किया। संचालन डॉ आशुतोष पारीक ने किया व डॉ जयदेव ने आभार अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
–कुलदीप सिंह रत्नू जिला अध्यक्ष संपर्क-9414982406