राजस्थान स्टेट एड्स कन्ट्रोल सोसायटी जयपुर के अधीनस्थ पिछले लगभग 15 वर्षों से मात्र 8000 से 13000 रू. के अल्प वेतन पर संविदा पर कार्य कर रहे है एड्स परियोजना के कार्मिक।
ए.आर.टी. सेन्टर अजमेर के डाटा मैनेजर यतीश अग्रवाल के अनुसार राजस्थान एड्स कन्ट्रोल सोसायटी के अधीन पूरे राज्य में लगभग 450 संविदा कार्मिक विभिन्न पदों जैसे डाटा मैनेजर, काउन्सलर, फार्मासिस्ट, लैब टैक्नीशियन, स्टाफ नर्स, सुपरवाईजर, सी.सी.सी. इत्यादि पदों पर कार्य कर रहे है।
नियमितिकरण की मांग को लेकर दिनांक 04.01.2019 को चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के अजमेर दौरे के दौरान ए.आर.टी. सेन्टर, अजमरे के डाटा मैनेजर यतीश अग्रवाल के नेतृत्व में सभी एड्स संविदा कर्मचारियों द्वारा ज्ञापन सौंप कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
पिछले 10-12 वर्षो में सभी कार्मिकों ने नियमितिकरण एवं समान कार्य -समान वेतन को लेकर भी कई बार मांगे उठाई है किन्तु सरकार द्वारा एड्स कार्मिकों के प्रति कोई ठोस कदम नही उठाये गये।
ए.आर.टी सेन्टर पर काउन्सलर के पद पर कार्यरत पुष्पा प्रजापति एवं सीमा कुमावत ने बताया कि जहां सरकार ने सभी नियमित कर्मचारियों एवं अधिकारियों को सांतवा वेतन आयोग की सौगात दी वही सभी एड्स कार्मिको की वार्षिक वेतन वृद्धि 10 प्रतिशत से घटा कर 5 प्रतिशत कर दी गई।
ए.आर.टी. सेन्टर अजमेर के काउन्सलर मो. सलीम खां ने बताया कि वर्ष 2013 में राजस्थान सरकार द्वारा विज्ञप्ति क्रमांक 1311 दिनांक 10.07.2013 द्वारा संविदा कार्मिकों हेतु बोनस अंक देते हुये सीधी भर्ती निकाली गई थी परन्तु कुछ समय बाद आचार संहिता लगने के कारण यह भर्ती प्रक्रिया पूर्ण नही हो पाई और वर्ष 2014 में भाजपा सरकार ने इस भर्ती को खारिज़ कर सभी संविदा कार्मिकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
ज.ला.ने. चिकित्सालय के ब्लड बैंक काउंसलर गंगासिंह ने बताया कि सरकार ने सभी संविदा कर्मियों हेतु कैडर बना रखा है परन्तु परामर्शदाता हेतु अभी तक कोई कैडर नही बनाया है जिससे परामर्शदाताओं को अनुभव आधारित बोनस अंक नही मिल पाते है।
आई.सी.टी.सी. काउन्सलर रितेश सैमसन ने बताया कि नेशनल एड्स कन्ट्रोल सोसायटी द्वारा वर्ष 2014 में देश के सभी राज्य सरकारों को संविदा एड्स कार्मिकों हेतु एन.ओ.सी. जारी कर दी है जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि राज्य सरकार यदि एड्स कार्मिकों को अपने स्तर पर नियमित करती है तो उन्हें कोई आपत्ति नही है।
कार्मिकों के अनुसार राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (ग्रुप-3) के प्रमुख शासन सचिव के आदेश क्रमांक 270/2013 दिनांक 11 मार्च 2013 को एड्स कन्ट्रोल सोसायटी के कार्मिको को राज्य सरकार के अधीन ही मानते हुये आवेदित पद के समान कार्य के आधार पर अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दे दिये गये थे। राजस्थान के सभी संविदा कर्मचारियों ने आवेदन शुल्क जमा करवा दिया था परन्तु वर्ष 2014 में सरकार बदलते ही भर्ती को रद्द कर दिया गया था।
कार्मिकों के अनुसार कांग्रेस सरकार ने संविदाकर्मियों के स्थायीकरण को लेकर घोषणा पत्र के श्रम एवं रोजगार के बिन्दु संख्या 3 में संविदा कर्मियों को बोनस अंक के आधार पर घोषणा की थी ऐसे मे समस्त कार्मिको ने सम्पूर्ण राजस्थान में वर्तमान सरकार के पक्ष में मतपूर्वक समर्थन किया था। सरकार द्वारा चिकित्सा विभाग में कार्यरत नर्सिंग स्टॉफ एवं लैब टैक्नीशियन को अनुभव के आधार पर बोनस अंक देते हुये सीधी भर्ती के माध्यम से पांच वर्ष पूर्व नियमित कर दिया गया परन्तु उन्हीं के साथ कार्यरत डाटा मैनेजर, काउन्सलर, फार्मासिस्ट एवं केयर कॉर्डिनेटर को छोड़ दिया गया।
राजस्थान में लगभग 62,000 एच.आई.वी. मरीजों के साथ कार्य करते हुये संविदाकर्मी पर हमेशा अवसरवादी संक्रमण जैसे टी.बी. इत्यादि का खतरा बना रहता है एवं इन मरीजों की जांच हेतु ब्लड सेम्पल लेने वाले कार्मिक भी हाईरिस्क में कार्य कर रहे है। प्रतिवर्ष कई संविदाकर्मी इंफेक्शन की वजह से बीमार हो जाते है बावजूद इसके सरकार द्वारा इन्हें किसी भी प्रकार का भत्ता प्रदान नही किया जाता है।
हम सभी संविदा एड्स कार्मिक सरकार से अपील करते है कि जिस प्रकार नर्सिंग स्टॉफ एवं लैब टैक्नीशियन को पांच वर्ष पूर्व नियमित किया उसी प्रकार हम सभी कार्मिकों जैसे डाटा मैनेजर, काउन्सलर, फार्मासिस्ट एवं केयर कॉर्डिनेटर को भी नियमित करने की कार्यवाही अमल में लाई जावें।
इस प्रेस वार्ता के दौरान काउन्सलर सुरेश निम्बार्क, सुरेश वर्मा, अनिता, फार्मासिस्ट रवि कुमार, केयर कॉर्डिनेटर रजिया बानू सहित समस्त विभागों के संविदा एड्सकर्मी मौजूद थे।
यतीश अग्रवाल
डाटा मैनेजर
ए.आर.टी. सेन्टर,
ज.ला.ने. चिकित्सालय, अजमेर।
मो.न.ं – 9828974199