केकड़ी :– कागज पर लिखा जब मां का नाम,कलम अदब से बोल उठी हो गए मेरे चारों धाम।
मां सभी के बच्चों के लिए सुख की कामना कर गुरु की शरण में जाने का मार्ग बताती है।मां हमेशा प्यार का ही पाठ पढ़ाती है।उक्त उद्गार बहन आशा ने बंजारा मोहल्ला स्थित राज कमल भवन पर आयोजित सत्संग के दौरान व्यक्त किए।
मंडल मीडिया सहायक राम चंद टहलानी के अनुसार बहन आशा ने कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है वहां प्रभु भगवान का निवास होता है । नारी का एक रूप माँ का भी होता है जो कि निरोल तप त्याग की मूरत के रूप में होती है,समय-समय पर नारी ने मिसाल कायम की है निरंकारी मिशन में ही देखें जगत माता बुधवन्ती, राजमाता कुलवंत कौर, माता सविंदर हरदेव और अब सतगुरु माता सुदीक्षा जी मिसाल के रूप में विद्यमान है।कहा भी गया है, “जननी जने तो भक्तजन या दाता या शूर,नहीं तो जननी बांझ रहे काहे गवाएं नूर”
एक नारी मां के रूप में सबकी आभारी होती है उसके ज्ञानकोष में अगर,मगर,किंतु,क्यों का कोई स्थान नहीं होता है हमेशा मंगल आचरण के रूप में होती है।
आज के समय में सबसे बड़ी सेवा अपनी मैं को मिटाना है। सत्संग,सेवा,सिमरन को कभी भी कल पर ना डालें क्योंकि कल काल का नाम होता है कब क्या से क्या हो जाए कुछ पता नहीं होता है। जिस प्रकार कमल कीचड़ में खिल कर भी निर्लेप रहता है उसी प्रकार जीव को दुनिया में निंदा,नफरत,चुगली,वैर, विरोध से दूर रहकर निरोल परमात्मा की भक्ति करनी है। जीवन में सतगुरु के उपदेश को,शिक्षाओं को अपनाकर जीवन जीना है।मानव जीवन में जिस इंसान ने ज़हर को उगलना नहीं वरन पीना सीख लिया उसका लोक और परलोक भी सुहेला हो जाता है जिस घर परिवार में एक भी व्यक्ति सूझवान, ज्ञानवान होता है वह अपने घर को हमेशा के लिए सवांर देता है।
सत्संग के दौरान दीपा,गुड्डू,पायल, नमन,विधि,संगीता,कंचन,सुमित्रा,हेमा,लवीना,रेणू,जया,निशा,विवेक,अशोक रंगवानी आदि ने गीत विचार भजन प्रस्तुत किए संचालन गीता वासवामी ने किया।