…असली सुकून तो आना सागर की बारादरी पर ही आना है

यह मॉल यह मार्ट तो जेब काटने का बहाना है असली सुकून तो आना सागर की बारादरी पर ही आना है। कुछ ऐसा ही दर्द उभर कर आया नाटक हर दिल अजीज अजमेर के मंचन में, अजमेर बुक फेस्टिवल मे शुक्रवार की रात मुद्रा थिएटर के राजेंद्र सिंह के द्वारा एकल नाट्य प्रस्तुति हर दिल अजीज अजमेर का मंचन किया गया। अजमेर की भौगोलिक, पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, साहित्य की कहानी कही गई। अजमेर के जंगल, पहाड़, जानवर, पक्षी, नदी,तालाब, झील, मंदिर, मस्जिद, घाट, आश्रम, इमारतें, दरवाजे, मोहल्ले, गलियां, वादियों को एक सूत्र मे पिरो कर नाट्य रूपांतरण किया गया है, हर दिल अजीज अजमेर। इसमें कुछ दर्द भी है जो हमें आने वाले भविष्य के लिए आगाह करता है कि हम हमारे शहर के लिए क्या कर रहे है, क्यों इसके स्वर्णिम इतिहास को सहेजने और आने वाले भविष्य के लिए सचेत नहीं है । विकास की अंधी दौड़ में क्यों इतने व्यस्त हो गए हैं कि हम अपनी जन्म और कर्म भूमि को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसी सोच को नए भविष्य के सामने रखने का प्रयास है हर दिल अजीज अजमेर।
नाट्य मंचन के बाद सप्तक परिवार की ओर से सुमधुर संगीत लहरियां इस पुस्तक मेले मैं बिखेरी गई।
कार्यक्रम में चुनाव पर्यवेक्षक केदारनाथ सिंह अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त निशांत जैन, उपखंड अधिकारी आर्तिका शुक्ला, आईपीएस अधिकारी हर्षवर्धन व आनंद आशुतोष सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
उप जिला शिक्षा अधिकारी दर्शना शर्मा, वर्तिका शर्मा, रश्मि भटनागर, पृथ्वीराज फाउंडेशन के दीपक शर्मा व अमित बजाज ने अतिथियों का स्वागत किया । अतिथियों ने राजेंद्र सिंह व सप्तक के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ पूनम पांडे और वर्तिका शर्मा शर्मा ने किया।

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