अजमेर 07 जुलाई, वैशाली नगर स्थित प्रेम प्रकाश आश्रम में चल रहे सत्गुरू स्वामी टेऊँराम जी महाराज जी के पांच दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम के चौथे दिन प्रातः सामूहिक ध्यान स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री के नेतृत्व में किया गया। जिसमें आश्रम के कई श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री ने ध्यान के विषय में व्याख्या करते हुए बताया कि कैसे इससे जीवन परिवर्तन आता है। मानसिक दुविधा से छुटकारा मिलता है। इसके पश्चात् संतों महात्माओं के सत्संग हुए जिसमें संत माणिकलाल, संत राजूराम, स्वामी मनोहरलाल जी के प्रवचन हुए। प्रेम प्रकाश मण्डलाध्यक्ष स्वामी भगतप्रकाश जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि मानव मात्र को जीवन में संयम धारण कर अपने पथ पर आगे बढ़ते जाना है। हमें ईश्वर के अस्तित्व में पूर्ण विश्वास होना चाहिए । भक्ति कभी भी दिखावे मात्र के लिए , कीमती पदार्थ चढ़ाने आदि जैसी नहीं होनी चाहिए। भगवान को दिखावा व कीमती पदार्थ नहीं चाहिए । अगाध श्रद्धा, विश्वास के साथ स्मरण करने से ही वे प्रसन्न हो जाते है । भगवान की भक्ति शुद्ध, सरल एवं शुभ भावना से करनी चाहिए । इस सारी प्रक्रिया में मन रूकावट डालता है वो दौड़ता ही रहता है। हमारे अन्दर कई तरह की शारीरिक व मानसिक व्याधियाँ है। जिन्हें सद्गुरू की शरण में जाएँ बिना ठीक नहीं किया जा सकता ।
सायंकालीन सत्संग सभा में कई तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बालक-बालिकाओं द्वारा दी गई। जिसमें अमरापुर के मिली सजायो जैसे कई भजनों को बालक बालिकाओं ने मंच पर प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उसके साथ ही सद्गुरू स्वामी टेऊँराम जी महाराज की जीवनी के अन्तर्गत एक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसके बाद स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री ने अपने प्रवचन में कर्मों के प्रतिफल के बारे में बताते हुए कहा कि हमें अपने किए कर्मां का फल अवश्य मिलता है । अच्छे कर्म का फल अच्छा एवं बुरे कर्म का फल बुरा मिलेगा । इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में मिलेगा। कई लोग ऐसा कहते है कि उनकों दान, पुण्य, व्रत, नियम का पालन करते एवं भक्ति करते काफी समय हो गया परन्तु जीवन में से कठिनाईयाँ नहीं जा रही है। इसका कारण यहीं है कि उसके मार्ग में कठिनाईयों रूपी कचरा बहुत है। जिससे कि उसको इस भक्ति रूपी मार्ग पर अपने गन्तव्य स्थान पर पहुचँनें में वक्त लगेगा। जिस प्रकार ट्रेफिक वाले रास्ते पर चलने से हमे रास्ता पार करने में समय लगता है लेकिन चलते रहने से अंततः हम रास्ता पार कर ही लेते है। वैसे ही हमें अपने भक्ति मार्ग पर शुभ कर्म करते हुए चलते जाना है। उसका शुभ फल हमें अवश्य मिलेगा। प्रेम प्रकाश आश्रम के महामण्डलेश्वर स्वामी भगत प्रकाश जी ने अपनी अमृतमय वाणी में बताया कि हमें स्वामी टेऊँराम जी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को बदलना है। हमें उनके बनाएं स्थान पर पूर्ण सच्ची भावना से सेवा, स्मरण, सत्संग करके अपने मानव जीवन को सफल बनाना है।
जन्मोत्सव के अन्तिम दिन दिनांक 08 जुलाई के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए आश्रम के सेवादारी जयकिशन पारवानी ने बताया कि प्रातः 6 बजे श्री गुरू महाराज की मूर्तियों की पूजा व 133 भोग लगाये जायेंगे। प्रातः 7 बजे 133 दीपों द्वारा महा आरती, 7:30 से 9 बजे तक हवन तत्पश्चात् ध्वजावन्दन, इसके बाद सत्संग व श्री प्रेम प्रकाश ग्रन्थ का भोग एवं आम भण्डारा। सायंकाल 4:30 से 9 बजे तक संत महात्माओं का सत्संग एवं पल्लव पाकर उत्सव की समाप्ति होगी।