दवाइयां लेने पर भी हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल ना हो तो अविलम्ब ले डाक्टर की सलाह

दोनों किडनियों को खून की सप्लाई करने वाली आर्टरी हो सकती है ब्लाॅक
मित्तल हाॅस्पिटल में किडनी की एंजियोप्लास्टी से नियंत्रित हुआ एक रोगी का हाई ब्लड प्रेशर
कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ राहुल गुप्ता और नेफ्रोलाॅजिस्ट डाॅ रणवीरसिंह ने 48 घंटे में रोगी को मिला आराम

अजमेर, 13 अगस्त ( )। मित्तल हाॅस्पिटल के कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ राहुल गुप्ता एवं नेफ्रोलाॅजिस्ट डाॅ रणवीरसिंह चौधरी द्वारा हाई ब्लड प्रेशर के एक रोगी की किडनी की एंजियोप्लास्टी करने से उसका ब्लड प्रेशर नियंत्रित हो गया साथ ही इसके कारण रोगी दिल, दिमाग, किडनी व आंख आदि शरीर के अंगों पर होने वाले असर के जोखिम से भी बच गया।
जानकारी के अुनसार नागौर जिले के रियांबड़ी तहसील स्थित जसनगर निवासी एक मरीज को गत कुछ माह से सिर में दर्द रहता था। ब्लड प्रेशर भी ज्यादा रहा करता था। दवाइयां लेने के बाद भी ऊपर का ब्लड प्रेशर 190, 200 व 205 व नीचे का 110 से कम नहीं होता था। गांव के ही एक मित्र की सलाह पर उसने अजमेर के मित्तल हाॅस्पिटल में गुर्दा रोग विशेषज्ञ डाॅ रणवीरसिंह चौधरी से परामर्श लिया। जांच में उसे पता चला कि उसकी दायीं किडनी को खून की सप्लाई करने वाली नस (आर्टरी) ब्लाॅक है व बायीं किडनी जन्मजात विकृत है एवं पेट में नीचे की तरफ स्थित है।
मित्तल हाॅस्पिटल के नेफ्रोलाॅजिस्ट डाॅ रणवीरसिंह चौधरी ने बताया कि रोगी की जांच कराए जाने पर पता चला कि ब्लड प्रेशर की वजह से उनके दिल पर और किडनी पर असर पड़ रहा था। रोगी के पेशाब में प्रोटीन जाने लगा था व खून में क्रिएटिनिन की मात्रा बढ़ गई थी। रोगी के दिल की ईको जांच कराई तो ज्ञात हुआ कि उसका दिल भी कमजोर पड़ रहा था। दिल की कार्य क्षमता जो नार्मल 65 प्रतिशत से घटकर 45 प्रतिशत रह गई थी। रोगी के रीनल डाॅप्लर जांच कराए जाने पर पता चला कि उसकी दोनों किडनी में ही गड़बड़ थी। बायीं किडनी अपने निश्चित स्थान पर ना होकर बहुत नीचे की तरफ थी। दायीं तरफ की किडनी अपनी जगह पर थी किन्तु किडनी को खून की सप्लाई करने वाली आर्टरी 95 प्रतिशत ब्लाॅक थी। इसी वजह से रोगी का ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं रहा करता था। कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ राहुल गुप्ता से सलाह ली गई और तय किया गया कि इनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने तथा इसकी वजह से उनके दिल, दिमाग, किडनी और आंख पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को बचाने के लिए उनकी किडनी की नस को खोला जाए। इसलिए मरीज की किडनी की एंजियोग्राफी की गई व एंजियोप्लास्टी की गई। 48 घंटे में ही रोगी का ब्लड प्रेशर नार्मल आ गया । मरीज दिन में दो बार 6 – 6 गोली (दवाइयां) लिया करता था वह घटकर 1 रह गई ।
100 में 2 या 3 मरीज के किडनी की खून सप्लाई बाधित:
डाॅ राहुल ने बताया कि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में नहीं रहता है। ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहने का कोई वाजिब कारण भी सामने नहीं होता है तो ऐसे मरीजों को दवाइयों के साथ उनके रीनल डाॅप्लर जांच कराए जाने की भी सलाह दी जाती है। रीनल डाॅप्लर जांच में सौ में से दो या तीन मरीजों के किडनी को खून की सप्लाई बाधित होने के लक्ष्ण पाए जाते हंै। यही उनके ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं रहने का कारण भी होता है। ऐसे में उनके किडनी को खून की सप्लाई करने वाली नस में छल्ला डाल दिया जाता है। यह हार्ट की एंजियोप्लास्टी किए जाने की तरह ही होता है। जिससे किडनी को खून पहुंचाने वाली नस (आर्टरी) चौड़ी हो जाती है और उनके खून की सप्लाई सामान्य होने से उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रण में आ जाता है।
ब्लड प्रेशर एक निरंतर चलने वाली बीमारी है। इसकी नियमित जांच कराएं , दवाएं ले, खानपान में परहेज करें, वजन ना बढ़ने दें। दूध व सलाद की मात्रा बढ़ाएं, नियमित वाॅक करें। ये सब करने के बाद भी यदि ब्लड प्रेशर नियंत्रण में नहीं है तो जांच करा कर कारण जानना पड़ता है कि ऐसा क्यों हो रहा है।
डाॅ राहुल गुप्ता, कार्डियोलाॅजिस्ट
ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर है। यह धीरे धीरे शरीर में चलता रहता है और ब्रेन, हार्ट, किडनी और आई को इफेक्ट करता रहता है। पता तब ही चलता है जब इसकी वजह से शरीर के अंगों पर असर दिखाई देने लगता है लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है। इसलिए सलाह यही है कि जब भी दवाइयां लेने के बाद भी ब्लड प्रेशर नियंत्रित ना रहे तो बिना समय गंवाए डाॅक्टर का परामर्श लेवें।
डाॅ रणवीरसिंह चौधरी, नेफ्रोलाॅजिस्ट
फोटो- मित्तल हाॅस्पिटल से छुट्टी मिलने से पूर्व रोगी के साथ चिकित्सक डाॅ राहुल गुप्ता व डाॅ रणवीरसिंह चौधरी।

सन्तोष कुमार गुप्ता/प्रबन्धक जनसम्पर्क/9116049809

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