अजमेर, 7 सितम्बर । 7 मोहर्रम 7 सितम्बर को असर की नमाज के बाद ताजियों शरीफ पर मेंहदी चढ़ाई गई। यह कार्यक्रम असर की नमाज के बाद शुरु होकर देर रात्रि तक चला। यह जानकारी देते हुए ख्वाजा साहब के गद्दीनशीन एस. एफ. हसन चिश्ती ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन के बड़े भाई हजरत इमाम हसन के पुत्र इमाम कासिम की याद में यह मेंहदी ताजिये शरीफ पर चढ़ाई जाती है। क्योंकि करबला के मैदान में हजरत इमाम कासिम दुल्हा बने हुए शहीद हुए थे। हसन चिश्ती ने बताया कि 8 मोहर्रम बमुताबिक 8 सितम्बर को रात्रि दस बजे बाद दरगाह के मुख्यद्वार से ताजिये शरीफ की सवारी होगी जो मर्सीहा पढ़ते हुए जुलूस के रुप में लंगरखाना गली होते हुए रात्रि 12 बजे छतरीगेट इमाम बारगाह पर सम्पन्न होगी। चिश्ती ने बताया कि रात्रि 12 बजे मुत्तवली साहब की हवेली से करबला शरीफ की सवारी होगी जो सुबह चार बजे छतरी गेट इमाम बारगाह पर सम्पन्न होगी।
9 मोहर्रम बामुताबिक 9 सितम्बर की रात्रि 10 बजे बाद छतरी गेट इमाम बारगाह से ताजिये शरीफ की सवारी शुरु होगी । ताजिये शरीफ की सवारी मर्सीहे पढ़ते हुए छतरी गेट इमाम बारगाह से शुरु होकर डोली वाला चौक होते हुए मुख्य इमाम बारगाह पहुंचेगी। वहां पर सभी श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार बच्चों को फल व सूखे मेवों से तोलेंगे व चांदी तथा कलावों की बेडिय़ां पहनायेंगे। हसन चिश्ती ने बताया कि ये बेडिय़ां हजरत इमाम हुसैन के बड़े पुत्र हजरत इमाम जैनुल आबेदीन की याद में पहनी जाती है। दस मोहर्रम बामुताबिक 10 सितम्बर सुबहां आठ बजे दरगाह के आहता-ए-नूर में कुरानख्वानी होगी व शौहदा-ए-करबला की याद में नौ बजे शाहदतनामा पढ़ा जायेगा एवं शहीदों की याद में सलाम पढ़ा जायेगा। यह कार्यक्रम दिन के एक बजे तक चलेगा। एक बजे दिन में ही छतरी गेट पर मर्सीहे पढ़े जायेंगे। 10 मोहर्रम की रात्रि बामुताबिक 10 सितम्बर को रात 10 बजे बाद मुख्य इमाम बारगाह से ताजिये शरीफ की सवारी होगी जो कि मर्सीहे पढ़ते हुए जुलूस के रुप में डोलीवाला चौक, छतरीगेट, लंगरखाना गली होते हुए तड़के 4 बजे दरगाह के मुख्यद्वार सवारी पहुंचेगी जहां से कमानीगेट सोलहखम्भे होते हुए दरगाह परिसर स्थित झालरे में सैराब किये जायेंगे।