*कस्बे के युवाओं ने मिडिल क्लास के जरूरतमंद परिवारों को दी राशन सामग्री*
✍️ लॉक डाउन के चलते जहां भामाशाह व सरकारी तंत्र राशन की सामग्री बांटकर थक चुके हैं।कुछ लोग इन व्यवस्थाओं का नाजयज फायदा भी उठा रहे हैं।वहीं दूसरी और बांदनवाड़ा ग्राम की महावीर इंटरनेशनल शाखा के युवाओं ने एक और अनूठी पहल करते हुए ना केवल कस्बेवासियों को वरन पूरे देश को एक नई मिसाल दी है।जी हां दोस्तों ये बिल्कुल नया अध्याय लिखा गया है जिसकी शुरुआत मेरे गांव से हुई है।मेरे गांव के इन युवाओं ने स्थानीय शाखा अध्यक्ष मनीष राजपुरोहित के नेतृत्व में गांव के उन लोगों का सर्वे किया जो मुख्यतः मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं।जिनको किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला,जिनके पास कृषि भूमि नहीं है और जो रोज कमाकर खाने वाले लोग हैं।उनका नाम डिस्क्लोज नहीं किया गया है।ना ही यहां किया जा रहा है।लेकिन वो वर्ग यहां जरूर बताया जा रहा है ताकि दूसरे लोगों की भी इससे प्रेरणा मिले।स्थानीय शाखा के सदस्य अध्यापक पवन धुमश, व्यापारी प्रभु सांखला,पत्रकार टोनी ठाकुर, त्रिलोक कुमावत, पुष्पेंद्र सिंह जोधा, हेमंत शर्मा, सुरेश प्रजापति,कमल शर्मा, देवेंद्र शर्मा ने मीटिंग कर कस्बेवासियों से राय मशविरा किया।जिस पर टेक्सी ड्राइवर, पानी पताशे वाले,नाई, बागवानी का काम करने वाले,बैंड बजाने वाले,एकल विधवा,चाय की रेडी लगाने वाले,हलवाई का काम करने वाले वेल्डिंग काम करने वाले,पिन्नारा सहित कुल 21 लोगों का चयन किया गया।जिनको 20 दिन का किराने का सामान दिया गया।ज्यादातर लोग आटा और मसाले आदि देते रहे हैं लेकिन इन युवाओं ने जानकारी ली तो पता चला कि गेंहू की फसल होने की वजह से आटे की जरूरत किसी को नहीं है इस पर पैकेट में बासमती चावल,पौहा, मूंगफली का तेल,बेसन, आलू, प्याज, लहसुन, दो तरह की दाल,सोयाबीन,शक्कर,चाय की पत्ती,सरसों का तेल,टूथपेस्ट आदि आइटम दिए।इन सभी कार्यक्रमों में बतौर चार्टर अध्यक्ष मेरी भी मौजूदगी रही है।यहां विशेष बात ये भी रही है कि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के पड़ोसी को भी ये पता नहीं लगने दिया गया कि उसको कोई सामग्री किसी ने दी है।शाखा के प्रत्येक व्यक्ति ने अपनी बाइक से जाकर उस व्यक्ति को सामग्री दी जिसका कमेटी द्वारा चयन किया गया।कुछ लोगों को इस बात पर भी एतराज होता है कि अमुक कार्य की फ़ोटो या न्यूज क्यों दी गई।यहां मैं स्पष्ट कर देना चाहूंगा पहली बात तो ऐसा एतराज उन्हीं को होता है जिसने अपने जीवन में कभी पांच रुपये समाजसेवा के नाम पर खर्च ना किये हो।और दूसरे वो लोग होते हैं जो सोचते हैं मुझे क्यों नहीं दिया।हमारा उधेश्य ये होता है कि अच्छे काम की खुशबू फैलनी चाहिए ताकि अच्छे कार्य करने वालों की हौसला अफजाई हो तथा दूसरों को भी प्रेरणा मिले।
*डॉ.मनोज आहूजा एडवोकेट एवं पत्रकार* 9413300227