संत किशनलाल माखीजानी की श्रृद्धांजलि सभा
अजमेर 2 मई- संत के वचन को सदैव याद रखकर सेवा कार्य के साथ नाम स्मरण करते रहना ही सच्ची श्रृद्धाजंति है। ऐसे आर्शीवचन ईश्वर मनोहर उदासीन आश्रम के महंत स्वरूपदास ने तुलसीकिशन धाम में संत किशनलाल टी.माखीजाणी के चैथा कार्यक्रम में श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुये कहे। उन्होने कहा कि सांई किशनलाल ने अपने सेवाकाल में भी राजकीय महाविद्यालय के सभी अधिकारी व कर्मचारी को दायित्व निर्वहन के साथ सद्व्यवहार की प्रेरणा दी व जीवनकाल में निरंतर नाम स्मरण,भक्ति व सेवा कार्याें से जोडा। स्वामी ईसरदास, सांई अर्जुनराम, भाई फतनदास, सेवाधारी कवंलप्रकाश किशनानी, पुरूषोतम उदासी, मनीष प्रकाश,हरीश तनवाणी, रजत वाधवाणी, उतम गुरबक्षाणी, राहुल थावराणी, शंकर सबनाणी ने भी अपनी ओर से श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुये उनके वचनों को जीवन में प्रेरणादायी बताया। पण्डित राहुल शर्मा ने रामधुनि के साथ श्रृद्धांजलि कराई।
कोरानावायरस के संक्रमण के कारण आयोजित लाॅकडाउन में संत जी के परिवारनजन, भक्तगण व अखिल भारतीय सिन्धुसंत समाज के संत महात्मा सम्मिलित नहीं हो सके और उन्होने शोक पत्र से ही अपनी गहरी सवेंदनायें प्रकट करते हुये भगवान श्रीचन्द्र से उनको अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की। महामण्डलेश्वर हंसराम उदासीन, भीलवाडा, महंत श्यामदास उदासीन किशनगढ, महंत हनुमानराम, स्वामी संतोखदास इन्दौर, सांई गणेशदास, भीलवाडा, स्वामी ख्मयादास सतना, सांई माधवदास व स्वामी मोहनदास इन्दौर, स्वामी हंसदास रीवा, दादी पुष्पा नागपुर, स्वामी ब्रहमानन्द शास्त्री, प्रेम प्रकाश आश्रम, भारतीय सिन्धु सभा के राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी, अध्यक्ष नरेन्द्र बसराणी, सिन्धी लेडीज क्लब की अध्यक्षय दिशा किशनानी, भीष्म मोदियाणी, पार्षद मोहन लालवाणी ने शोक सवेंदनाए प्रकट की।
(कवंलप्रकाश किशनानी)
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