केकड़ी 24 नवंबर(पवन राठी)पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव शांति पूर्वक सम्पन्न हो गए और प्रत्याशियों के भाग्य EVM में बंद हो चुके है।
मतदान में मतदाताओं की रुचि स्पष्ट देखने को मिली जिससे मतदान कम हुवा केकड़ी में 56-47सरवाड़ में61-42व सावर पंचायत समिति के लिए 57-32%ही हुवा।तमाम प्रशासनिक प्रबंधों के बावजूद भी 14 कोरोना पॉजिटिव में से एक ने भी अपने मत का उपयोग नही करना भी उनकी अरुचि का ही परिचायक है।
कम मतदान और भा ज पा द्वारा मतदान से तीन दिन पूर्व से जो ताकत प्रचार में झोंकी गई उसके कारण चुनाव परिणाम बहुत ही चोंकाने वाले होंगे।कांग्रेस और भा ज पा दोनों1ही दलों द्वारा तीनो पंचायत समितियों में अपने अपने प्रधान बनने के दावे किए है।दोनों ही दल अपने अपने प्रत्याशियों की जीत के प्रति आश्वस्त नजर आए है।इसी कारण दोनों ही दलों द्वारा अपने प्रत्यासियो की बाड़ेबंदी की जाकर अज्ञात स्थान पर ठहराया गया है।
मतदाताओं की अरुचि के कारण राजनीतिक विश्लेषक भी चुनाव परिणामो के बारे में कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे है।
तीनो ही पंचायत समिति क्षेत्रो में BJP ने कांग्रेस के एक तरफा चल रहे माहौल को जी जान से जुटकर कांग्रेस को पटखनी देने में कोई कसर बाकी नही छोड़ी इसे नकारा नही जा सकता।अनेक स्थानों पर कांग्रेस और BJP के बीच कांटे की टक्कर है।
सावर पंचायत समिति क्षेत्र में जंहा कांग्रेस प्रधान बनना मतदान से तीन दिन पूर्व तय माना जा रहा था लेकिन मतदान तकBJP ने सभी समीकरण पलट डाले।इसके कारण स्थिति अस्पस्ट बनी हुई है।केकड़ी व सरवाड़ पंचायत समिति क्षेत्र में भी BJP द्वारा कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी गई है। इसके कारण भी चुनाव परिणाम प्रभावित होंगे।इन चुनावों में देखा गया कि कांग्रेस के सरपंच पद के हारे हुए प्रत्याशी BJP का साथ देते दिखाई दिए।
कांग्रेस की और से चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने अपने पुत्र सागर शर्मा के साथ तूफानी दौरे करके भरपूर प्रचार करके विकास के लिए कड़ी से कड़ी जोड़ने के लिए मत मांगे थे वह कितना सफल होगा यह तो 8 दिसंबर को नतीजे आने पर ही मालूम हो पायेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की राज्य में सरकार होने के बावजूद भी आशानुरूप विकास कार्य गांवों में नही होने से कांग्रेस की अपने पक्ष में मत देने हेतु अपील भी मतदाताओं को अपनी और आकर्षित
नही कर पाई -जिसके कारण भी वोटर्स ने कांग्रेस से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा।
दूसरी और BJP के पास भी कोई बड़ा मुद्दा नही था जिसके बलबूते वह एक मुश्त वोटर्स को अपनी और आकर्षित कर पाती।इसके बाद भी BJP ने मतदान से 3 दिन पूर्व संगठित होकर चुनाव प्रचार में जो अपनी ताकत झोंकी उसने2सभी समीकरणों को हिलाकर रख दिया।
दोनों दल अपने अपने प्रत्याशियों की बाड़े बंदी के बाद प्रधान बनाने को लेकर चिंतन मनन में जुट गए है।प्रधान बनने के सपने संजोए प्रत्याशियों द्वारा भी अपने जोड़ तोड़ के प्रयास अंदर खाने प्रारम्भ कर दिए गए है।
सभी की नजरें अब 8 दिसंबर को आने वाले चुनाव परिणामो पर टिकी हुई है।सभी को इंतजार है यह जानने का की किसके सिर सजेगा प्रधान पद का ताज।