कांग्रेस सेवादल का इतिहास त्याग, तपस्या और बलिदान का इतिहास

अजमेर 27 दिसम्बर ( ) कांग्रेस सेवादल के 98वे स्थापना दिवस पर कांग्रेस सेवादल अजमेर के पूर्व जिलाध्यक्ष व पूर्व प्रदेश संगठक शैलेन्द्र अग्रवाल ने सेवादल के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 28 दिसम्बर 1923 को हिंदुस्तानी सेवादल के नाम से डॉ. एन एस हार्डिकर जी ने इस संगठन का गठन किया तथा 7 मार्च 1947 को इसका नाम हिन्दुस्तानी सेवादल से बदल कर कांग्रेस सेवादल कर दिया गया और इसके प्रथम अध्यक्ष प. जवाहरलाल नेहरु थे।त्याग और अपेक्षाकृत निस्वार्थ कर्म की जो चेतना गांधी जी, नेहरू जी व डॉ. हार्डिकर जी ने जलाई थी उसकी लौ आज भी बुझी नही है, सेवादल के कार्यकर्ता व पदाधिकारी इस बदले हुए जमाने में भी इसी भावना से काम करते हैं कि हमें पार्टी से लेना कम व देना ज्यादा है। कांग्रेस सेवादल का इतिहास त्याग, तपस्या और बलिदान का इतिहास है तथा देश की आजादी के लिए स्वतन्त्रता आन्दोलन के इतिहास व कांग्रेस के इतिहास में भी सेवादल की महत्वपूर्ण भूमिका है। सेवादल की अपनी अलग से पहचान व छवि है। सेवादल कांग्रेस का एक अनुशासित संगठन है।
सेवादल के कार्यकर्ता देश व कांग्रेस पार्टी के लिए निस्वार्थ सेवाभाव से कार्य करते हैं।
सेवादल कोई मामूली संगठन नही है यह कांग्रेस के अनुशासित स्वयं सेवकों की ऐसी फौज है जिसने आजादी की लड़ाई में भी कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी तथा आजादी के बाद भी आज तक निस्वार्थ सेवा भावना से कांग्रेस के प्रत्येक कार्यक्रम, अधिवेशन, रैलियों, सम्मेलनों आदि में सेवादल को सौंपी गयी जिम्मेदारियों का सेवादल के कार्यकर्ता पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन करते हैं। सेवादल का महत्व इसी बात से प्रतीत हो जाता है कि डॉ. हार्डिकर जी, प.जवाहरलाल नेहरू जी, श्रीमती इन्दिरा गांधी जी, श्री राजीव गांधी जी तथा श्रीमती सोनिया गांधी जी आदि नेता स्वयं सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। समय समय पर अकाल, बाढ़, सूखा, महामारी जैसी राष्ट्रीय व प्राकृतिक आपदाओं के समय में भी सेवादल के स्वयं सेवकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

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