नेत्र दान कर किया पुण्य अर्जित

केकड़ी 30 जनवरी *पवन राठी* / केकड़ी के खिड़की गेट निवासी हरिप्रसाद झंवर के निधन के बाद भारत विकास परिषद के तत्वाधान में नेत्रदान किया गया । शहर का यह दूसरा नेत्रदान होगा स्वर्गीय हरिप्रसाद झंवर जिन्होंने जीते जी जिंदगी के कई सामाजिक कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन मरने के बाद भी अपनी आंखों को दान करके दो लोगों की जिंदगियों को रोशनी दे गए दरअसल सुबह हरिप्रसाद झंवर खेलने के लिए आए थे इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। मौत होने के बाद परिषद भारत विकास परिषद के संरक्षक रामनरेश विजय और किशन गोपाल सोनी अध्यक्ष को सूचना दी गई परिजनों ने बताया कि स्वर्गीय हरिप्रसाद झंवर और उनकी पत्नी कमला देवी ने पहले ही भारत विकास परिषद के सहयोग से मृत्य उपरांत मेडिकल कॉलेज में देहदान की घोषणा कर दी थी उन्होंने बताया कि उनका शरीर मरने के बाद मेडिकल के लिए के छात्रों के सुपुर्द किया जाए। लेकिन कोविड-19 के कारण वर्तमान में देहदान असंभव है और उसके बाद उन्होंने परिजनों ने व उनकी पत्नी कमला देवी ने नेत्रदान की इच्छा जाहिर की भारत विकास परिषद के रामनरेश विजय व किशन गोपाल सोनी ने तुरंत इसकी सूचना जवाहरलाल नेहरू अजमेर की आई बैंक सोसाइटी को दी सूचना मिलते ही सोसाइटी के प्रभारी डॉ भरत कुमार शर्मा अपनी टीम के साथ केकड़ी पहुंचे और परिजनों की उपस्थिति में स्वर्गीय हरिप्रसाद झंवर की आंखों की कॉर्निया निकाली गई परिजनों ने चिकित्सा विभाग की टीम को आंखों की कोर्निया सुपुर्द की गई। नेत्रदान के बाद डॉक्टर भरत कुमार शर्मा ने बताया कि स्वर्गीय हरिप्रसाद झंवर मरने के बाद भी उन लोगों के काम आएंगे जिन्होंने कभी इस दुनिया को नहीं देखा उनकी दोनों आंखें दो लोगों को एक नई जिंदगी देगी। डॉ भरत कुमार शर्मा ने बताया कि कई लोगों की भ्रांतियां है कि नेत्रदान के दौरान आंखें निकाली जाती है उन्होंने बताया कि यह सिर्फ भ्रांतियां है मरणोपरांत सिर्फ आंखों की कॉर्निया निकाली जाती है आंखें यथावत रहती है उन्होंने मरने के बाद दूसरे लोगों को जिंदगी देने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को नेत्रदान करने की अपील भी की। गौरतलब है कि मरणो प्रांत केकड़ी शहर का यह दूसरा नेत्रदान है। गौरतलब है कि स्वर्गीय हरिप्रसाद झंवर की पत्नी ने भी देहदान की घोषणा कर रखी है। पत्नी कमला देवी ने इस मौके पर बताया कि मरने के बाद उनके पति की आंखें अगर दो लोगों की जिंदगी को खुशहाल बना सकती है तो यह सबसे बड़ा पुणे कर्म है।

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