जनाना अस्पताल में अतिरिक्त बाल चिकित्सक नियुक्त करे सरकार: देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर 16 मार्च।
अजमेर के जनाना अस्पताल में नवजात शिशुओं के समुचित ईलाज की पुख्ता व्यवस्था के लिए बाल रोग चिकित्सकों की एक अतिरिक्त युनिट सृजित कर चिकित्सक नियुक्त किये जाए। यह मांग विधायक वासुदेव देवनानी ने मंगलवार को विधान सभा में प्रश्नकाल के दौरान उठाई।
देवनानी ने चिकित्सा मंत्री से कहा कि जेएलएन अस्पताल के बाल रोग विभाग में वर्तमान में एक यूनिट के प्रभारी के पास अस्पताल के अधीक्षक की जिम्मैदारी होने से प्रशासनिक कार्य में व्यस्त रहते है तथा एक अन्य यूनिट के प्रभारी चिकित्सक गत एक वर्ष से अस्वस्थ होने से अवकाश पर चल रहे है। चूंकि जनाना अस्पताल में नवजात शिशुओं के ईलाज हेतु भी रोजाना जेएलएन से चिकित्सकों की टीम जाती है एसे में वहां के लिए अतिरिक्त चिकित्सक नियुक्त किये जाने चाहिए।
देवनानी द्वारा सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशुओं की मौतों को लेकर एक सवाल पूछा गया था। सवाल के जवाब में सरकार ने बताया है कि दिसम्बर 2019 व दिसम्बर 2020 में कोटा के जे.के. लोन अस्पताल में एक साथ अधिक संख्या में हुई शिशुओं की मौतों के मामले में कराई गई जांच में कोई भी दोषी नहीं पाया गया है। इस सम्बंध में देवनानी ने चिकित्सा मंत्री से पूछा कि जब कोई दोषी नहीं पाया गया तो वहां के अधीक्षक, उप अधीक्षक व नर्सिंग अधीक्षक को क्यों हटाया गया तथा कुछ चिकित्सकों को एपीओ क्यों किया गया परन्तु मंत्री रघु शर्मा इसका जवाब देने के बजाय नवजात शिशुओं की मौतों के लिए परिस्थितिजन्य अन्य कारणों का बखान करने लगे।
देवनानी ने कहा कि कोटा में हुई नवजात शिशुओं की मौतों से राज्य सरकार की बदनामी होने के बाद जिस प्रकार जे.के. लोन अस्पताल में भवन के रिनोवेशन व आवश्यक चिकित्सीय संसाधन उपलब्ध कराने हेतु बड़ी राशि स्वीकृत की गई है तथा चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाॅफ की नियुक्ति की गई है उसी प्रकार प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी कोटा जैसी घटनाओं के घटित होने से पहले ही आवश्यक व्यवस्थाओं पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
देवनानी ने कहा कि चिकित्सा मंत्री इस बात के लिए खुद अपनी पीठ थपथपा रहे है कि नवजात शिशुओं की अधिक मौतों के मामलों में देश के 10 राज्यों में राजस्थान शामिल नहीं है परन्तु गौरतलब है कि क्या वे प्रदेश को शिशुओं की न्यूनतम मौतों की दृष्टि से शुरूआती राज्यों के बराबर ला पाए है। चिकित्सा मंत्री के गृह जिले के संभाग स्तरीय जेएलएन चिकित्सालय का हाल बुरा है। आपातकालीन वार्ड में एक्स रे व सोनोग्राफी तक की सुविधा नहीं है। दो साल में सीटी स्केन मशीन कई बार खराब हो चुकी है परन्तु नई मशीन नहीं लगवा सके। ट्रोमा संेटर में एक आर्थोपेडिक वार्ड से ज्यादा कोई सुविधा नहीं है। कैथ लेब में एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी लगभग बंद हो गई है। बाईपास सर्जरी का सेंटर बना होने के बाद भी सर्जन नहीं लगा सके। उन्होंने कहा कि चिकित्सा मंत्री कोई एसी एक उपलब्धि या नई सौगात तो बता दे जो उन्होेंने अजमेर के लिए विशेष रूप से की हो। जेएलएन चिकित्सालय में जो भी नये वार्ड बने है या जिनका निर्माण चल रहा है वे सभी केन्द्र द्वारा स्वीकृत स्मार्ट सिटी योजना के तहत हो रहे है। गत भाजपा सरकार ने पंचशील क्षेत्र में सीएचसी का निर्माण कराया था जिसमंे विशेषज्ञ चिकित्सक व स्टाॅफ तक नियुक्त नहीं कर पाए जिसके कारण भवन निर्माण पर खर्च सरकारी राशि का सदउपयोग नहीं हो पा रहा है व ना ही क्षेत्रवासी लाभान्वित हो पा रहे है। अजमेर में अब तक कहां पर व कितने जनता क्लिनिक खोले गये, कहीं पर नजर तो नहीं आते। कोविड के ईलाज के लिए भर्ती हुए मरीजों ने अस्पताल में भारी असुविधाओं का सामना किया परन्तु चिकित्सा मंत्री ने कभी उनकी सुध नहीं ली।

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