अजमेर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मानव अधिकार परिषद के अध्यक्ष शैलेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा से अजमेर जिले के जितने भी (प्रदेश के )सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सक मरीजों को देखते हैं उनकी फ़ीस निश्चित करने की मांग की है।
शैलेश गुप्ता ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि कोरोना महामारी में भी इन चिकित्सकों ने। अपनी की फिसों में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। पूर्व में यह चिकित्सक घर पर देखने के 15 दिन में फीस दोबारा लिया करते थे इस बीच में अगर मरीज दिखाने आता था तो फीस नहीं लेते थे, परंतु अब दो दिन बाद ही वापस अगर मरीज दिखाने जाता है। डॉक्टर को तो पूरी फीस वापस लेते है इन डॉक्टरों की इंसानियत ना जाने कहां मर गई है अपने ही घर पर मेडिकल स्टोर खोल लिये हैं जो दवाई लिखते हैं, उसी दुकान पर मिलेगी। महंगी महंगी दवाइयां लिख देते हैं जिसको एक्स-रे की एवं जांच की जरूरत नहीं होती। उन्हें भी जांच कराने की कहते हैं। क्योंकि उसमें दवा कंपनियों से इनका कमीशन बंधा हुआ होता है। ऐसे में मेरा चिकित्सा मंत्री जी वे मुख्यमंत्री से निवेदन है कि इनकी फीस निर्धारित की जाए। एवं जिन्होंने भी अपने घरों में मेडिकल की दुकानें खोल ली है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। आज एक और तों कोरोना महामारी फैल रही है। लोगों के पास पैसे नहीं है और इन लोगों ने खुली लूट मचा रखी है जिसकी जांच होनी चाहिए एवं जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कई सरकारी चिकित्सक अस्पताल में कोरोना महामारी का भय दिखाकर अस्पताल में देखते नहीं है और अपने घरों पर मरीजों को देखते हैं। घरों पर लंबी लंबी लाइन लगी है। कोई सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं करते। सैनिटाइजर की मशीन लगा रखी है, परंतु काम नहीं करती। जिस क्षेत्र में इन डॉक्टरों के मकान है उसके आसपास दर्जनों की संख्या में मरीज इधर-उधर घूमते रहते हैं जिससे वहां के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनके वाहन भी दूसरे लोगों के घरों के सामने खड़े कर दिए जाते हैं।