प्रतिपक्ष की भूमिका में कांग्रेस के पार्षद, अपने ही पालिका अध्यक्ष के खिलाफ विरोध में

केकड़ी 1 जून (पवन राठी)
केकड़ी शहर और यहां के सत्ता के गलियारों से इन दिनों जिस तरह की आहट पैदा हो रही है शायद यह कांग्रेस के लिए संकेत अच्छे नहीं हैl केकड़ी नगर पालिका जहां पर कांग्रेस ने 25 सालों बाद स्पष्ट बहुमत के साथ कांग्रेस का बोर्ड बनाया है ,लेकिन शायद आज भी कांग्रेस के पार्षद इसको सिर्फ एक सपना ही समझते हैंl उसी का नतीजा है पालिका में कुछ दिनों में ही जिस तरह से दो घटनाक्रम हुए हैं उससे स्पष्ट होता है कि केकड़ी नगर पालिका में प्रतिपक्ष की जरूरत ही नहीं lकांग्रेसका ही बोर्ड और कांग्रेसी पार्षद प्रतिपक्ष की भूमिका भी अदा कर रहे हैं lमंगलवार को भी कुछ ऐसा ही वाकया हुआ जब कांग्रेस के पार्षद अपने ही पालिका अध्यक्ष के खिलाफ खड़े हो गए, बात दरअसल छोटी थी लेकिन इस तरह की घटनाओं से कहीं ना कहीं पार्टी की छवि धूमिल होती है। सोमवार को सिर्फ पालिका अध्यक्ष के रूम में बैठने को लेकर विवाद हुआ, और यह विवाद इस तरह बढ़ गया कि सभी कांग्रेस के पार्षद पालिका अधिशासी अधिकारी के पास अपने ही पालिका अध्यक्ष की शिकायत लेकर पहुंचे गए ।हालांकि इस घटनाक्रम से होना कुछ नहीं था लेकिन बहुत कुछ हो गया, पालिका के कुछ ऐसे पार्षद भी है जो अपना पूरा दिन पालिका में ही बिताते हैं ।दरअसल सोमवार को पालिका अध्यक्ष कमलेश साहू ने अपने दफ्तर में ताला लगवा दिया, और बगैर उनकी इजाजत के ताला नहीं खोलने का हुक्म दे दिया ।कमरे पर लगे ताले को देखकर कांग्रेस के एक पार्षद को यह बात नागवार गुजरी और पार्षद महोदय इस बात को अपनी प्रतिष्ठा पर ले लिया ,और कुछ ही देर में सभी कांग्रेसी के पार्षदों फोन पर सूचना देकर पालिका में इकट्ठा कर लिया गया ।कांग्रेस के सभी पार्षद इस दुखड़े को लेकर अधिशासी अधिकारी के समक्ष पहुंच गए।, एक बारगी तो अधिशासी अधिकारी भी इस तरह की शिकायत पर अचंभित हो गए कि कांग्रेस के पार्षद कांग्रेस के ही पालिका अध्यक्ष की शिकायत लेकर चेंबर में पहुंचे। नए-नए अधिशासी अधिकारी और उनके सामने ऐसा संकट पैदा हो गया कि जिसका जवाब उनके पास नहीं था । शहर के मीडिया कर्मियों को भी इस बात की भनक लगी और मामले की पड़ताल करने पालिका में पहुंचे तो वाकई मामला ऐसा ही था ।उसके बाद पालिका अध्यक्ष के पिता ने रूठे हुए पार्षदों की मान मनुहार की और यहां तक की पालिका अध्यक्ष को किसी अन्य कमरे में बैठाने और पार्षदों को पालिका अध्यक्ष के कमरे में बैठने तक की बात बोल दी गई। लेकिन कांग्रेस के कुछ रूठे हुए पार्षदों ने यहां तक कह दिया कि वह पालिका अध्यक्ष के कमरे में पैर तक नहीं रखेंगे ।गौरतलब है कि आज से कुछ माह पूर्व भी कांग्रेस पार्षद के एक भाई ने नगर पालिका में टेंडर प्रक्रिया को लेकर घमासान किया था, उधर पालिका अध्यक्ष कमलेश साहू ने कुछ पार्षदों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी पार्षद को पालिका अध्यक्ष के चेंबर में बैठने के लिए मना नहीं किया बल्कि जिस वक्त कोई भी नहीं हो उस वक्त चेंबर में ताला लगाने के निर्देश दिए ।उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व ही पालिका द्वारा सर्वे करके कुछ सूचियां बनाई गई थी ,उन महत्वपूर्ण सूचियो के कागजात गायब हो गए थे ।इसी को देखते हुए उन्होंने सिर्फ कोई व्यक्ति नहीं होने पर चेंबर में ताला लगाने की बात कही। नगर पालिका में करीब दो – ढाई घंटे तक यह ड्रामा चला और अंत में पालिका अध्यक्ष के पिता द्वारा रूठे हुए कुछ पार्षदों की मनुहार के बाद भी मामले का पटाक्षेप नहीं हुआ । इस नाटकीय घटनाक्रम पर अभी विराम नहीं लगा है। लगातार दो बार पालिका में हुई ऐसी घटनाओं से ऐसा लगता है कि कांग्रेस के बोर्ड में प्रतिपक्ष के नेताओं की जरूरत ही महसूस नहीं हो रही है ।क्योंकि यहां प्रतिपक्ष की भूमिका भी कांग्रेस के ही पार्षदो द्वारा निभाई जा रही हैं। हालांकि आज भी कांग्रेस के अधिकतर पार्षद इस तरह के विरोध का मुंह छिपाकर समर्थन कर रहे थे ,लेकिन उनके दिल में कुछ और था और दिमाग में कुछ और !

पालिका उपाध्यक्ष चुनाव के बाद कुछ पार्षदों में अभी भी है नाराजगी
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केकड़ी नगर पालिका मैं स्पष्ट बहुमत के बाद पालिका उपाध्यक्ष पद को लेकर जो विवाद हुआ था अभी भी कहीं ना कहीं कुछ पार्षदों में वह खटास जिंदा है और उसी का नतीजा है कि किसी न किसी रूप में यह विरोध में बदल जाती है।

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