एमडीएस यूनिवर्सिटी की बदहाली के लिए सरकार जिम्मेदार

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर, 9 जुलाई। पूर्व शिक्षा मंत्री व विधायक अजमेर उत्तर वासुदेव देवनानी ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि सरकार ने इसकी स्थिति प्राइमरी स्कूल से भी बदतर बना दी है। पिछले कई महीनों से कामचलाऊ कुलपति के भरोसे विश्वविद्यालय चल रहा है, जिससे सभी व्यवस्था चरमरा गई हैं।
देवनानी ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि कामचलाऊ कुलपति ओम थानवी जो 5 माह बाद अजमेर आये का सारा ध्यान कांग्रेस की पैरवी और राजनीति करने में है, उन्हें विश्वविद्यालय से कोई सरोकार नहीं है। जबकि कुलपति जैसे गरिमापूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति को राजनीति से दूर रहना चाहिए। समझ में नहीं आता है कि वे कांग्रेस के एजेंट हैं या कुलपति। जो परीक्षा फॉर्म अक्टूबर-नवम्बर, 2020 में भरवा लिए जाने थे, लेकिन विश्वविद्यालय की नाकामी के कारण परीक्षा फॉर्म भरवाने वाली फर्म को कोर्ट में जाने का मौका मिल गया। यही कारण है कि पिछले दिनों कोर्ट द्वारा उस फर्म की याचिका खारिज करने के बाद अब फॉर्म भरने शुरू हुए हैं। यदि परीक्षा फॉर्म पहले ही भरवा लिए जाते, तो अब जल्द से जल्द परीक्षाएं कराने में दिक्कत नहीं आतीं। इसे देखते हुए यह समझ में नहीं आ रहा है कि कब परीक्षाएं निपटेंगी, कब तक परिणाम निकलेंगे और कब से नया सत्र शुरू हो सकेगा।
देवनानी ने कहा कि विश्वविद्यालय में पिछले कई वर्षों से शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। लेकिन खाली पदों को भरने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। भवनों की हालत दिनों-दिन जर्जर होती जा रही है, किंतु मरम्मत कराने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। यही कारण है कि पिछले दिनों बृहस्पति भवन के पिछवाड़े की दीवार गिर गई। भवनों की कई वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है, जिससे कर्मचारियों और अधिकारियों में हर समय हादसा होने का भय बना रहता है। साफ-सफाई की तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। पीने के पानी की टंकियों की सफाई हुए अरसा बीत गया है।
देवनानी ने कहा कि पूर्व कुलपति प्रो. के.सी. सोडानी के कार्यकाल में शिक्षकों के कुछ पद भरे गए थे, लेकिन अब भी अनेक पद खाली हैं, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ता है। जो शिक्षक हैं, उनसे पढ़ाई कराने की बजाय अन्य प्रशासनिक कामकाज कराए जाते हैं। वर्तमान में हर शिक्षक के पास किसी ना किसी प्रकार का प्रशासनिक काम है। शिक्षकों की कमी से विश्वविद्यालय की स्थिति प्राइमरी स्कूल से बदतर कर दी गई है। पूरे प्रदेश में सबसे बदतर स्थिति इसी विश्वविद्यालय की बनी हुई है। कामचलाऊ कुलपति थानवी कभी-कभी अजमेर आते हैं, तो महज खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। देवनानी ने कहा कि सरकार को तत्काल इस विश्वविद्यालय की ओर ध्यान देकर स्थिति में सुधार करना चाहिए, वरना यह विश्वविद्यालय अपना अस्तित्व खो देगा।

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