
देवनानी ने जारी बयान में कहा कि थानवी महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति बनने के बाद से ही विवादों में थे। वे एक राजनीतिक विचारधारा से ग्रस्त होकर काम कर रहे थे और अपने निर्णय पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर ले रहे थे। उनके निर्णयों और कार्यशैली से पिछले करीब 11 महीने से इस विश्वविद्यालय का सारा ढांचा चरमरा रहा था। यदि वे कुछ दिन और कार्यवाहक कुलपति के रूप में बने रहते तो विश्वविद्यालय का पूरा बेड़ागर्क हो जाता।
जरूरी फाइलें निपटाने की नहीं थी फुर्सत
देवनानी ने कहा कि थानवी के कार्यकाल में शैक्षिक कार्य पूरी तरह गड़बड़ा गया। थानवी शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को आपस में लड़ाकर वैमनस्य पैदा कर रहे थे। शोध कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था। वे जब भी अजमेर आते, तो कुछ घंटे रूक कर और अपने चहेतों से चर्चा कर चले जाते थे। जरूरी फाइलें काफी समय से उनके आॅफिस में पेंडिंग पड़ी हुई थीं, जिनको निपटाने की उनके पास फुर्सत नहीं थी। देवनानी ने उम्मीद जताई है कि नए कार्यवाहक कुलपति के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में शैक्षिक कार्य में सुधार होगा और प्रशासनिक कामकाम भी पटरी पर आएगा।
भाजपा जनप्रतिनिधियों ने दिया था ज्ञापन
पिछले दिनों उनकी अगुवाई में भाजपा के शिष्टमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर थानवी को तत्काल प्रभाव से हटाकर किसी शिक्षाविद् को कार्यवाहक कुलपति का दायित्व सौंपने की मांग की थी। इस शिष्टमंडल में देवनानी के अतिरिक्त सांसद भागीरथ चैधरी, पूर्व राज्यसभा सदस्य ओंकारसिंह लखावत व देहात भाजपा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत आदि थे।
उल्लेखनीय है कि कुलाधिपति व राज्यपाल ने मंगलवार को आदेश जारी कर थानवी को कार्यवाहक कुलपति पद से हटाकर उनकी जगह जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति प्रो. प्रवीणचंद्र त्रिवेदी को अग्रिम आदेशों तक कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया है। हरिदेव जोशी पत्रकारिता व जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति थानवी को 22 सितंबर, 2020 को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया था।