भगवान के मुख से निकली दिव्य वाणी है भागवत ग्रंथ -राम रसायन

श्री रामद्वारा में श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का आयोजन
ब्यावर,(हेमन्त साहू)। श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा वाचन करते हुए जोधपुर से पधारे संतराम रसायन ने कहा कि भगवान को तीन चीज अति प्रिय है। गीता, गोपी और गाय। आज का समाज संसार की पाश्चात्य चकाचौंध में गीता को भुलाया जा रहा है। गोपी को जलाया जा रहा है। और गाय को काटा जा रहा है। मानव धर्म की शिक्षा का प्रधान ग्रंथ गीता का अध्ययन नहीं करता है। गोपी यानी समाज की स्त्री को दहेज में जिंदा जलाया जा रहा है। मानो स्त्री एक वस्तु है, विश्वास समझकर दहेज के माध्यम से उसका क्रय विक्रय किया जाता है। गाय को काटा जा रहा है, जो हमारी संस्कृति की धरोहर है। जिस माता के ऊपर हमारी संस्कृति टिकी हुई है। उस गोपी और गीता का अनादर करने वालों के ऊपर भगवान कभी प्रसन्न नहीं हो सकते हैं। श्रीमद् भागवत महापुराण की रचना सर्वप्रथम भगवान विष्णु ने चतुश्लोकी भागवत की। कथा जगतपिता ब्रह्मा को सुनाई थी। ब्रह्मा जी ने नारद जी को सुनाया। नारद जी ने व्यास जी को सुनाया। व्यास जी ने भागवत के प्रवक्ता सुखदेव जी को और सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को सुनाते हुए बताया कि भागवत ग्रंथ, आदि अनादि सृष्टि के कर्ताधर्ता भगवान के मुखारविंद से निकली हुई दिव्य वाणी है। भगवान शंकर एवं मां पार्वती के प्रसंग का वर्णन करते हुए दक्ष यज्ञ की कथा का श्रवण कराया और कहा कि कभी भी समाज में पति पत्नी को बाहर का झगड़ा घर में लेकर नहीं आना चाहिए। क्योंकि बाहर का झगड़ा जब घर में आता है तो घर की शांति भंग होती है। घर का माहौल अशांतिपूर्ण हो जाता है। धर्म सभा में रूद्र्र झंवर, भगवान साहू, विरेन्द्र दुबे, राकेश यादव, भगवान भाई, राजेन्द्र गर्ग, रमेश चौहान, मोहन, पुनमचन्द कुमावत, श्रीरामचंद्र शर्मा, जेठमल अग्रवाल, गोविन्द सोनी, दुर्गा साहू, काता सांखला, पुष्पा डाणी, मेना माली, भंवरी मेंवाडा, छोटी देवी साहू, मधु माली, सोनू अग्रवाल, दुर्गा सांखला, कांता गुजराती सहित अनैक श्रद्धालु मोजुद थे।
आज धु्रव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र एवं वामन भगवान की कथा- रामद्वारा ट्रस्ट के अध्यक्ष संत केवल राम महाराज ने कहा रविवार का कथा के अंदर धु्रव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र एवं वामन भगवान की कथा का सुंदर वर्णन किया जाएगा। अत: सभी धर्म प्रेमी सज्जनों से निवेदन है कि वह अधिकार अधिक संख्या में पधार कर श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का श्रवण कर जीवन को धन्य बनाएं।

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